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तैयारियों का जायजा लेने मिर्ज़ापुर पहुँचे Chief Secretary, मां विंध्यवासिनी का किया दर्शन

तैयारियों का जायजा लेने मिर्ज़ापुर पहुँचे Chief Secretary, मां विंध्यवासिनी का किया दर्शन।मिर्ज़ापुर : कोरोना संक्रमण के चल रहे बचाव कार्यो का जायजा लेने आज मिर्ज़ापुर पहुँचे राजेंद्र कुमार तिवारी प्रदेश मुख्य सचिव। 26 जुलाई 2020 रविवार करीब 11:30 बजे मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी हेलीकाप्टर से अष्टभुजा हेलिपैड पर उतरे। वहाँ से वो मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने पहुँचे। पूजा अर्चना के बाद वे विंध्याचल स्थित अष्टभुजा डाक बंगले में लंबे समय तक गहन समीक्षा बैठक में शामिल हुए। वहीँ पर बने शेमफोर्ड स्कूल में बने क्वारंटाइन सेंटर जायजा किया।उनके आने की सूचना शनिवार को शाम में जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल को फोन पर मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की आने की सूचना मिली, जिसके बाद आनन-फानन में प्रशासन उनके आने की तैयारियों में जुट गया। इस बैठक में मिर्ज़ापुर और सोनभद्र के तमाम अधिकारी शामिल हो रहे है। वही उनके आने की तैयारियों में तमाम अधिकारी सुबह से लग गए थे।अष्टभुजा डाक बंगले में लंबे गहन समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव के सहित मण्डलायुुक्त, डीआईजी, डीएम, पुलिस अधीक्षक और सीएमओ आदि अधिकारी मौजूद रहे।बैठक के बाद मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लोगों को कोरोना से डरने की एकदम जरुरत नहीं है न इसको लेकर किसी तरह की जानकारी प्रशासन से छुपाएं। सरकार ने अब होम क्वारंटाइन का अनुमति दे दिया है। संक्रमण को कदापि न छुपाये, टेस्ट कराये और सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को पालन करे। आप शत प्रतिशत स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने ने बताया कि शुरुआत में 50 60 टेस्ट होते थे और अभी प्रदेश में अभी 50 हज़ार 55 हज़ार टेस्ट हो रहे है। इसे बढ़कर 1 लाख तक किया जायेगा। वही मिर्ज़ापुर में अभी 300 400 लोगो की टेस्ट हो रही है। इसको भी बढ़ाकर 1 हज़ार करने की तैयारी है। देख-रेख पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घर घर जाकर कन्टेनमेंट एरिया में स्क्रीनिंग किया जा रहा है।आगे उन्होंने आगे कहा कि कोरोना के रोकथाम हेतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेतृत्व पूरी टीम लगी हुई है और उत्तरप्रदेश की जनता उनका भरपूर साथ दे रहा है। पुरे प्रदेश में कोरोना जाँच का दायरा बढ़ा है।उन्होंने ने कहा कि पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद परेशान होने की बात नही है। आप गाइडलाइन का पालन करें, शारीरिक दूरी बनाए रखें और मास्क का प्रयाेग करें। जरा-सा भी कोरोना संक्रमण के लक्षण होने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें एवं जांच कराएं, इससे डरने की जरूरत नहीं है।जब बेड की कमी पर पूछा गया तो उन्होंने बेड की कमी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मिर्ज़ापुर में क्या पूरे प्रदेश में कहीं भी बेड की कमी नहीं है। वर्तमान समय में जितने हमारे पास बेड है, उसमें से सिर्फ 15 फीसद बेड का ही प्रयोग हो पा रहा है। इस पर हम लगातार ध्यान बनाए हुए हैं।आपकी क्या राय है मुख्य सचिव के दौरे पर हमें कॉमेंट करके बताइये

Lockdown Rule: मिर्ज़ापुर में उल्लंघन करने वालों से वसूला गया 39,33,050 ₹ का जुर्माना

Lockdown Rule: मिर्ज़ापुर में उल्लंघन करने वालों से वसूला गया 39,33,050 ₹ का जुर्माना।मिर्ज़ापुर : जिस तरह कोरोना संक्रमण आज तेज़ी से पूरे देश में फ़ैल रहा है। सरकार के हाथ पैर फूल रहे है, इसको रोकने में। शुरूआती दौर ( मार्च में) सरकार ने Lockdown तो किया । लेकिन जब अर्थव्यवस्था पटरी से उतरने लगी तो सरकार ने Lockdown में ढिलाई देने लगी। लेकिन जहाँ भी संक्रमण तेज़ी से फैल रहा सरकार वहाँ कड़ाई से Lockdown Rule का पालन करवा रही।प्रशासन Lockdown Rule नहीँ पालन करने वाले से जुर्माना भी वसूल रही है।इसी क्रम में मिर्ज़ापुर पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान उल्लंघन करने वाले से कल तक 39,33,050 ₹ का जुर्माना वसूल चुकी है। इस में मास्क न पहना, बिना वजह सड़क पर घूमने जैसे उल्लंघन पर जुर्माना वसूला गया है।मिर्ज़ापुर पुलिस ने बताया कि 26165 अलग-अलग लोगों से इतना रकम वसूला गया है।आपको बता दे की कोरोना वायरस के कारण 22 मार्च 2020 से चलाये जा रहा अभियान में मिर्ज़ापुर पुलिस ने अलग-अलग थानाक्षेत्रों से 122 दिन में इतना रकम वसूला गया है। ये रकम संशोधित अधिनियम 15(3),15(4) के तहत मास्क न पहनने वालों के विरुद्ध करवाई चलाकर वसूला गया है।मिर्ज़ापुर पुलिस के PRO सेल ने लोगों से अपील किया है है कि जब भी घर से बाहर निकले मास्क पहनकर निकले। फिजिकल डिस्टेनसिंग का पालन करे। अपने गाडी के ड्राइविंग लाइसेंस सहित पूरी कागजात को साथ लेकर चले और हेलमेट पहनकर ही बाइक चलाये अन्यथा पुलिस महकमा आपकी जेब खाली करते रहेगी और अपना खजाना भरते रहेगी।वहीं जब मिर्ज़ापुर पुलिस अधीक्षक डॉ धर्मवीर सिंह से मीडिया के एक कार्यक्रम के दौरान पूछे गए सवाल “क्या मास्क की जगह गमछा लगाकर बाहर निकल सकते हैं?इस पर एस पी साहब बोलते हैं : हां बिलकुल निकल सकते है लेकिन गमछा गले में नहीं मुंह पर होना चाहिए, नहीं तो कार्रवाई हो जाएगी।आपकी क्या राय है प्रशासन के इस कदम पर हमें कॉमेंट करके ज़रूर बताइये

Kargil Vijay के बीएसएफ जवान को दर-दर भटकना पड़ रहा है न्याय के लिए लगाया गुहार

KARGIL VIJAY के बीएसएफ जवान को दर-दर भटकना पड़ रहा है न्याय के लिए लगाया गुहार।मिर्ज़ापुर : आज पुरे देश में Kargil Vijay दिवस मनाया जा रहा है। आज पुलिस मेमोरियल सहित अनेक जगहों पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। लेकिन जो उस लड़ाई में बचे जवानों का आज कोई सुध लेने वाला नहीं है। आज उन्हें न्याय के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।मिर्ज़ापुर जनपद के जमालपुर थाना क्षेत्र के खडेहरा गांव निवासी बीएसएफ का Kargil Vijay जवान अपने जमीन व पैसा के न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।खडेहरा गांव निवासी जयप्रकाश सिह वर्तमान में बार्डर सिक्यरिटी फोर्स मे भारत बांग्लादेश सीमा पर तैनात है। Kargil Vijay जवान अपने पैसा या जमीन को लेकर मुख्यमंत्री, डीएम, एसपी व स्थानीय पुलिस प्रशासन से न्याय के लिए गुहार लगा रहे हैं।बता दे कि खडेहरा गांव निवासी युवक मार्च 1996 मे सीमा सुरक्षा बल मे तैनात हुए थे। कुछ साल बाद वर्ष 2013 मे गांव के ही एक व्यक्ति आलु बियार ने अपने रिश्तेदारो सुखराम, लुज्जन, नथुनी, मोती, सालिक इत्यादि ग्राम रीवा थाना जमालपुर में 6 बीघा जमीन अपनी पत्नी बिनु देवी, भाई की पत्नी मीनाक्षी सिंह व ससुर हरिशंकर सिंह के नाम जमीन खरीद के लिए एग्रीमेन्ट कागजात बीस लाख पैतिस हजार रूपये मे कराया था। इस दौरान तत्काल नौ लाख रूपये नगद देकर और डेढ लाख रूपये स्टाम्प खर्च करके एग्रीमेन्ट चुनार तहसील मे कराया और तीन साल बाद बाकी पैसा देकर जमीन बैनामा कराने का वादा किया था। लेकिन एग्रीमेन्ट के कुछ दिन बाद Kargil Vijay जवान को पता चला कि उपरोक्त जमीन विवादित है । तब से अब तक नही जमीन रजिस्ट्री नही हुई और ना ही विपक्षियों ने पैसा वापस किया। इस संबंध में दोनों पक्ष के बीच जमालपुर थाने में दो बार पंचायत व समझौता हुआ लेकिन पैसा अभी तक जवान को पैसा नहीं मिला।Kargil Vijay जवान बताते हैं कि जब उन्हें पता चला की जमीन विवादित है तब उन्होंने उनलोगों से बोला की या तो आप फ्रेश जमींन दीजिये या फिर पैसा लौटा दीजिये। लेकिन लगातार उनको आज दें देंगे-कल दे देंगे के नाम पर घुमाया गया । फिर थक हार उन्होंने कोर्ट के माध्यम से नोटिस भी दिया, उसको भी नहीं माने। फिर पुलिस चौकी में भी आवेदन दिया, ऑफलाइन और ऑनलाइन आईजीआरएस के माध्यम से भी आवेदन किया। उन्होंने बताया कि जब भी समझौता होता हैं तो विपक्ष के लोग बोलते पैसा वापस कर देंगे ।मार्च में भी समझौता हुआ था अभी फिर 30 दिनों के लिये घर आया हूँ तो फिर पिछले 12 जुलाई को थाने में फिर समझौता मे तय हुआ था कि 19 जुलाई को विपक्षियों द्वारा पैसा वापस कर दिया जाएगा। लेकिन अभी तक पैसा पैसा नही लौटाया गया है। आगे बताते है कि विपक्षियों द्वारा उलटे उनपर गलत तरीके से एफआईआर कराके मानसिक प्रताड़ना किया जा रहा है। वे बोलते है कि आलु बियार का यहाँ गिरोह चलता है। वे पहले भी ऐसा कारनामा कर चुके है। वे बताते है कि चूंकि वो बॉर्डर पर तैनात है तो घर कम आते जाते है तो विपक्ष के लोग परेशान कर रहे है ताकि थक हार कर मैं पैसा मांगना छोड़ दूँ।वे बताते है कि वो देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात पहरा देते है। लेकिन देश के अन्दर उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है। सरकार ऐसी रवैया पर वो काफी निराश है।जवान ने जमालपुर पुलिस को तहरीर दी है तथा न्याय के लिये गुहार लगाया है।आपकी क्या राय है इस ख़बर पर हमें कॉमेंट करके ज़रूर बताइये साथ ही इस खबर को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए जिससे देश के इस वीर Kargil Vijay जवान को उनका हक मिल सके

नगर पालिका का भोंपू Loudspeaker : सोते कर्मचारी, जागते नागरिक

नगर पालिका का भोंपू : सोते कर्मचारी, जागते नागरिक।मिर्ज़ापुर : नगरपालिका ने पूरे शहर में भोंपू लगाया है जिसमें ज़ोर-ज़ोर से ज्ञान-वर्धक, जीवनोपयोगी भाषण लोगों को सुनाया जा रहा है। दिन भर सुनना लाज़मी है लेकिन ये रात में भी शुरू रहता है। जिससे आम जनता की रातों की नींद हराम हो चुकी है। इस समस्या से तंग आ कर लोग पहुँचे शिकायत करने पहुँचे लेकिन लोगों को जगाने वाले भोंपू को लगाकर नगर पालिका के कर्मचारी खुद सो गए हैं।संवेदनशील हॉट-स्पॉट क्षेत्र वासलिगंज में नगर पालिका के लोग बिना मास्क के पूरा करते दिखे टास्कजनपद के वासलिगंज क्षेत्र में नगरपालिका के कर्मचारियों को बिना उपयुक्त सुरक्षा संसाधनों के काम करते हुए पाया गया।गौरतलब है कि जिस मोहल्ले में कर्मचारी काम कर रहे थे वह एक हॉट-स्पॉट घोषित क्षेत्र है। हमारी टीम जब मौके पर पहुँची तो इस मामले में कतराते हुये नज़र आये।सवाल ये बनता है कि नगरपालिका जहाँ भोंपू लगाकर लोगों को जगा रही है वहीं उसके कर्मचारियों में ऐसी लापरवाही?शहर में से प्रचार, सरकार खुद के घर मे भी करिये विचार । जागरूकता के नाम पर नींद में खलल डालकर लोगो को जगाती विभाग को जगाने की जिम्मेदारी किसकी ?आपका क्या कहना है नगरपालिका के इस अनूठे प्रयास पर, अपनी राय हमें कॉमेंट करके ज़रूर बतायें

मिर्ज़ापुर की ढाई हजार साल पुरानी Nagvanshi बावली का अस्तित्व खतरे में

मिर्ज़ापुर की ढाई हजार साल पुरानी NAGVANSHI बावली का अस्तित्व खतरे में।मिर्ज़ापुर : बचपन में हम लोगों ने लकड़हारे और उसकी कुल्हाड़ी वाली कहानी ज़रूर पढ़ी या सुनी होगी। लेंकिन ऐसी ही एक कहानी वास्तविकता में विद्यमान है। ये कहानी मिर्ज़ापुर के कांतिपुर गाँव की है। करीब ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व इस गाँव के नागवंशी राजा ने नाग कुंड बनवाया था । वर्तमान में यह स्थान कंतित के नाम से जाना जाता है, इस कुंड बावन घाट के बावली से जाना जाता है। इस प्रसिद्ध नागकुंड के बारे में ऐसा मानना है कि जब कोई भी गरीब व्यक्ति अपने जरूरत के समय इस कुंड के पास आकर प्रार्थना करता था तो इस कुंड से बर्तन से भरी वस्तु प्रकट हो जाती थी।यहाँ के लोगो का मानना है कि नाग पंचमी के दिन इस कुंड में नहाने से सभी प्रकार से दुःख दर्द से निजात मिलता है। नाग पंचमी के दिन घाट का प्रांगण पूजा पाठ, वैदिक मंत्रों से गूंजते रहता है। लेकिन इस पुरातात्विक, धार्मिक व ऐतिहासिक कुंड का अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।क्या है पूरा इतिहास इस कुंड का।बताया जाता है कि प्राचीन कांतिपुर जो मिर्ज़ापुर के पास स्थित है जिसे अब कंतित के नाम से जाना जाता है। ये नागवंशियों के राज्य की राजधानी हुआ करता था । करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व कांतिपुर गाँव के नागवंशी राजा ने इस नागकुंड को बनवाया था । यहाँ से कुछ दूर पर ही विन्ध्याचल पर्वत और माँ गंगा के संगम पर स्थित है। इतिहासकार बताते है कि आराध्य देवी माँ विंध्यवासिनी की पूजा अर्चना करने के पहले नागवंशी इसी पवित्र कुंड में स्नान करते थे ।कुंड में स्नान करने के लिए चारों तरफ से सीढियाँ बनायीं गयी हैं। प्रत्येक ओर से सीढियों का निर्माण कर कुंड के अन्दर बावन घाट बनाये गये है । जिसके कारण इसका नाम बावन घाट की बावली भी पड़ गया है। कुंड में पानी के लिए तलहटी में पांच कुएं हैं। इसमें स्नान करने से सभी दुःख दर्द एवं मनोकामना की गयी फल की प्राप्ति होती है। ऐसा मानना है कि जब भी किसी जरूरत मंद ने यहाँ आकर जब भी हाथ फैलाकर जो माँगा उसे इस कुंड ने दिया है।यहाँ के पुरोहित अनुपम महाराज बताते है कि इस कुंड लेकर बहुत से मान्यताएं है। वे बताते है कि इस कुंड से गरीब लोग जरूरत के हिसाब से बर्तन मांगते थे और इस बर्तन को अपने यहाँ शादी विवाह, उत्सव में प्रयोग करते थे। प्रयोग करने के बाद वे बर्तन को लौटा देते थे। लेकिन कुछ समय बाद अराजक लोग इस बर्तन को नहीं लौटाने लगे। वे बर्तन को गायब करने लगे है। इस माया शक्ति को चुनौती देने लगे है। जिसके कारण माया शक्ति विलुप्त होने लगी। जो यहाँ की बावली है उसकी पूजन भी विलुप्त होने लगी थी। चूंकि नए सनातनी धर्म से जुड़े लोग विशेष प्रकार से नाग देवता का पूजन करते है एवं गाय के शुद्ध दूध से अभिषेक किया जाता है। जिससे नाग देवता बहुत प्रसन्न होते है और कंतित वासियो सहित विश्व के सभी लोगो का रक्षा करते है।वे आगे बताते है कि वर्ष में एक बार नाग पंचमी को विशेष पूजन का आयोजन कराया जाता है। जिससे लोगों को नाग देवता का आशीर्वाद का प्रदान करवाया जा सके। इस दिन बड़े धूमधाम से पूजन कराया जाता है।कर्णावती नदी से लेकर ओझला तक का स्थान पुरातात्विक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है कई ऐतिहासिक स्थान है । जिनकी खुदाई करने पर काफी इतिहास कुछ मिल सकता है ।लेकिन न तो पुरातात्विक विभाग और न ही शासन प्रशासन का ही ध्यान इस कुंड की ओर जा रहा है ।आपको हमारी यह ख़बर कैसी लगी हमें कॉमेंट करके बताइये और इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए।

Nag Panchami 2020 : कोरोना के चलते टूट जायेगी मिर्ज़ापुर की प्राचीन परंपरा

Nag Panchami 2020 : नागपंचमी से दंगल-अखाड़ा का आयोजन देश के विभिन्न स्थानों पर सालों से किया जाता है।

मिलिये मिर्ज़ापुर के Green Guru Ji से लगा चुके है अबतक 1851 पेड़

मिलिये मिर्ज़ापुर के GREEN GURU JI से लगा चुके है अबतक 1851 पेड़।मिर्ज़ापुर : जिस तरह से शहरीकरण, औधोगिकरण के चलते पेड़ो और जंगलों की कटाई हो रही है।लगता है कि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा एवम स्वच्छ वातावरण का नसीब ही नही होगा। इस बात को सोचकर आये दिन पर्यावरण को लेकर हम लोग चिंतित रहते। हर वर्ष एक दिन पर्यावरण दिवस के रुप मनाते तो जरूर है पर वो पर्यावरण दिवस मनाने के रूप सिर्फ रस्म अदा ही रह जाती है। पर्यावरण दिवस के दिन हमलोग अनेको पेड़ तो जरूर लगाते है लेकिन देखरेख के आभाव वो पेड़ पूरी तरह से उग नही पाता। लेकिन पर्यावरण दिवस से प्रभावित होकर मिर्ज़ापुर के अनिल सिंह धरती को हरा बनाने को ठानी है।कैसे बने अनिल सिंह।अनिल सिंह पेशे से शिक्षक है । वर्ष 2015 के पर्यावरण विभाग के द्वारा 1 जुलाई 2015 से पौधारोपण अभियान चलाया गया उससे वो इतने प्रभावित हुए की उस दिन उन्होंने धरा को हरा बनाने को ठाना। उस दिन से वो तन, मन, कर्म, सोच सबसे पर्यावरण को बचाने का प्रण लिया है। लोग इनको अब ग्रीन गुरु जी कहके पुकारते है। उनकी दिनचर्या पेड़ लगाने के बाद ही शुरू होती है।अनिल सिंह मड़िहान तहसील के पचोखरा स्थित शांति निकेतन इंटर कालेज में बतौर अध्यापक के रूप में पढ़ाते है। वे रोज़ाना एक पौधा लगाते है और उसकी देखभाल करते है। अबतक वो 1851 पेड़ लगातार लगा चुके है।मिर्ज़ापुर शहर के जेपीपुरम कालोनी में रहने वाले शिक्षक अनिल सिंह उर्फ ग्रीन गुरु बताते है कि बचपन से ही उनको पर्यावरण से लगाव था। इंटरमीडिएट के दौरान वो कलम विधि से पेड़ को तैयार करके उसको लगाया था।ग्रीन गुरु अनिल सिंह ने कहते हैं की उनके बुजुर्गो द्वारा लगाए हुए पेड़ो के कारण ही आज हमलोग स्वच्छ हवा ले पा रहे है। अब हमलोगो का दायित्व है कि अगले पीढ़ी के लिया पर्यावरण का रक्षा करे एवम पेड़ लगाए। अगर हमलोग पेड़ नही लगाएंगे तो आने का वाली पीढ़ी को सुंदर एवम स्वच्छ जीवन कैसे दे पाएंगे। यही नही वो अपने हाथों से अपने घर पेड़ उगाते हैं। ये अपने घर में ही नर्सरी का स्वरुप दिया है।जिस तरह से प्रदूषण बढ़ रहा है। ग्लेशियर पिघल रहा है। हम लोगों को सावधान हों जाना चाहिए। नही तो आगे जाकर ये विकराल रूप ले सकता है। हम सभी को ये संकल्प लेना चाहिए कम से कम साल भर एक पेड़ लगाए और जब तक वो पूर्ण रूप से विकसित न हो जाये तब तक उसकी देखभाल करें तथा औरों को पर्यायवरण के प्रति सजग करे।

स्कूल प्रबंधन के मनमानी को लेकर अभिभावक प्रतिनिधि मंडल ने सौंपा डीएम को ज्ञापन

स्कूल प्रबंधन के मनमानी को लेकर अभिभावक प्रतिनिधि मंडल ने सौंपा डीएम को ज्ञापन।आये दिन स्कूल प्रबंधन के मनमानी खबर आते रहती है। इन दिनों भी स्कूल प्रबंधन का मनमानी का खबर चर्चा में है। कोविड संक्रमण के चलते स्कूल काफी महीनों से बंद है। इन दिनों स्कूल की क्लासेज ऑनलाइन चल रही है । जिसमे स्कूल के पंखा, लैब,बिजली ,मेंटेनेन्स आदि खर्च नहीँ हो रहे है फिर भी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से इन सभी चीज़ों का पैसे वसूल रहे है।इन सभी बातों को लेकर मंगलवार को अभिभावक का प्रतिनिधि मंडल ने मिर्ज़ापुर के डीएम से कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपा। अभिभावकों ने प्रधानमंत्री, शिक्षामंत्री, मुख्यमंत्री आदि को संबोधित पत्र डीएम को सौंपा। जिसमे स्कूल प्रबंधन से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने की बात कही। तथा अभिभावकों को सहूलियत दी जानी चाहिये की बात रखी। हालांकि कुछ स्कूलों ने चार महीनों की फीस माफ़ भी की है वही कुछ ने नहीँ। अभिभावकों ने डीएम से मिलकर स्कूल प्रबंधन द्वारा अलग अलग शुल्कों पर लगाम लगाने की बात कही।अभिभावकों ने कहा इन दिनों वो आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन का ऐसा रवैया अपनाना हम अभिभावकों के साथ अनुचित है। आगे उन्होंने डीएम को ज्ञात कराया कि कुछ स्कूल फीस माफ़ कर रहे है । वही ज्यादातर स्कूल अभिभावकों से जबरन फीस के लिए दबाब बना रहे है। अभिभवकों ने डीएम से मांग की नर्सरी से लेकर इंटरमीडिएट तक को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने को आदेश दे।आगे कहा कि नर्सरी से इंटरमीडिएट तक कोविड महामारी के दौरान छात्रों की क्लास ऑनलाइन घर पर ही ली जा रही है फिर भी स्कूल प्रबंधन द्वारा लैब, ट्रांसपोर्टेशन आदि शुल्क ट्यूशन फीस सहित वसूल रहे है। कुछ स्कूल तो ऑनलाइन कलास लेंने में बजाय वीडियो क्लिप अथवा पीडीएफ दे रहे है।ऐसे में स्कूल प्रबंधन के गलत नीतियों के कारण बच्चो का भविष्य अधर में जा रहा है। इस पर प्रशासन को सख्त से सख्त निर्णय लेना चाहिए।

Kajari : कजरी की धुनों पर बनाया कोरोना जागरूकता गीत, आप भी सुनिये और शेयर कीजिए

कजरी की धुनों पर बनाया कोरोना जागरूकता गीत, आप भी सुनिये और शेयर कीजिए।मिर्ज़ापुर जनपद की लोकप्रिय कजरी गायिका अजित श्रीवास्तव ने कजरी गीत के माध्यम से फैली वैश्विक महामारी के प्रति जागरूक करने के लिए एक गीत बनाया है। जिसे काफी पसन्द किया जा रहा है आप भी सुनिये ये गीत नीचे दिए गए वीडियो में।कोरोना वैश्विक महामारी से मिर्ज़ापुर भी अछूता नही रहा, देखते ही देखते कोरोना में मिर्ज़ापुर में भी अपने पाँव पसारने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में सभी जनपदवासियों को इस महामारी की रोकथाम के लिए किए जाने वाले उपायों और नियमों से अवगत कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है।शासन और प्रशासन इस कार्य में तेजी से जुटा हुआ है कि कैसे सभी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कराया जाए और मास्क पहनने की अनिवार्यता पर ध्यान दिया जाए। इस प्रयास में सफलता भी हाथ लगी है।अब सावन का महीना भी आ चुका है। भले ही कोरोना हमारे बीच मौजूद है लेकिन हमारे मन में तो सावन की पहली फुहार से ही मन का मयूर नाचने लगता है और एक धुन है जो हमारे डीएनए में शामिल हो चुकी है जिसका नाम है कजरी। आज कल के डिजिटल युग के युवा भले ही इससे अनभिज्ञ हों परन्तु यही हमारी असली धरोहर हैं।क्या होती है कजरी।माँ विंध्यवासिनी के आँचल में जन्मी कजरी जिसका नाम माँ के उपनामों में से एक माँ कजला के नाम रखा गया है। कजरी एक विरह गीत है जिसे महिलाये सावन के महीने में अपने प्रियतम से बिछुड़ने पर गाती है । ताकि उनकी विरह वेदना उनके प्रियतम तक गीतों माध्यम से पहुंचे । कजरी ग्रामीण परिवेश की संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य और उसके रूपों का सुन्दर तरीके से वर्णन करने का भी एक माध्यम है ऋतुराज सावन के महीने में जब प्रकृति अपने अनुपम सौंदर्य से पूर्ण होता है तो बागो में झूला हाथो में प्रीतम के नाम की रची मेहदी लगाये । मूलतः महिलाएं इस विरह गीत को गाती है।शब्दों की मिठास से इन गीतों को गाया जाता है कजरी मुख्य रूप से उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल के मिर्ज़ापुर, वाराणसी व गोरखपुर जैसे जिलो में प्रमुख लोक गीतों में से एक है अगर तीनो जिलो की बात करें तो कजरी तीन प्रकार की होती है मिर्ज़ापुरी कजरी, बनारसी कजरी और गोरखपुर की कजरी। इन जिलो में गायी जाने वाली कजरी में शब्दों का अंतर होता है मिर्ज़ापुरी कजरी में सखी, ननद, भौजाई का नाम जोड़ कर कजरी गायी जाती है तो वहीं बनारसी कजरी अपने अल्हड़पन और बिंदास बोलो की वजह से एक अलग पहचान है इसमें कजरी गीतों में अइले-गइले जैसे शब्दों का उपयोग किया जाता है । बात करें गोरखपुरी कजरी की तो अपनी अलग ही ठेठ अन्दाज़ है इसमें हरे रामा, हे हारी के कारण इस कजरी की अपनी अलग ही पहचान है । गौरतलब है इन सभी कजरी गीत की विधाओं में मिर्ज़ापुर की कजरी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है ।आज कजरी पूर्वांचल से निकल कर देश विदेश तक पहुंच चुकी है मगर दिन प्रति दिन इसकी चमक खोती जा रही है। धरोहर के इन गीतों के संरक्षण की बहुत ज़रूरत है ।

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मिर्ज़ापुर की ढाई हजार साल पुरानी Nagvanshi बावली का अस्तित्व खतरे में

मिर्ज़ापुर की ढाई हजार साल पुरानी NAGVANSHI बावली का अस्तित्व खतरे में।मिर्ज़ापुर : बचपन में हम लोगों ने लकड़हारे और उसकी कुल्हाड़ी वाली कहानी ज़रूर पढ़ी या सुनी होगी। लेंकिन ऐसी ही एक कहानी वास्तविकता में विद्यमान है। ये कहानी मिर्ज़ापुर के कांतिपुर गाँव की है। करीब ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व इस गाँव के नागवंशी राजा ने नाग कुंड बनवाया था । वर्तमान में यह स्थान कंतित के नाम से जाना जाता है, इस कुंड बावन घाट के बावली से जाना जाता है। इस प्रसिद्ध नागकुंड के बारे में ऐसा मानना है कि जब कोई भी गरीब व्यक्ति अपने जरूरत के समय इस कुंड के पास आकर प्रार्थना करता था तो इस कुंड से बर्तन से भरी वस्तु प्रकट हो जाती थी।यहाँ के लोगो का मानना है कि नाग पंचमी के दिन इस कुंड में नहाने से सभी प्रकार से दुःख दर्द से निजात मिलता है। नाग पंचमी के दिन घाट का प्रांगण पूजा पाठ, वैदिक मंत्रों से गूंजते रहता है। लेकिन इस पुरातात्विक, धार्मिक व ऐतिहासिक कुंड का अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।क्या है पूरा इतिहास इस कुंड का।बताया जाता है कि प्राचीन कांतिपुर जो मिर्ज़ापुर के पास स्थित है जिसे अब कंतित के नाम से जाना जाता है। ये नागवंशियों के राज्य की राजधानी हुआ करता था । करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व कांतिपुर गाँव के नागवंशी राजा ने इस नागकुंड को बनवाया था । यहाँ से कुछ दूर पर ही विन्ध्याचल पर्वत और माँ गंगा के संगम पर स्थित है। इतिहासकार बताते है कि आराध्य देवी माँ विंध्यवासिनी की पूजा अर्चना करने के पहले नागवंशी इसी पवित्र कुंड में स्नान करते थे ।कुंड में स्नान करने के लिए चारों तरफ से सीढियाँ बनायीं गयी हैं। प्रत्येक ओर से सीढियों का निर्माण कर कुंड के अन्दर बावन घाट बनाये गये है । जिसके कारण इसका नाम बावन घाट की बावली भी पड़ गया है। कुंड में पानी के लिए तलहटी में पांच कुएं हैं। इसमें स्नान करने से सभी दुःख दर्द एवं मनोकामना की गयी फल की प्राप्ति होती है। ऐसा मानना है कि जब भी किसी जरूरत मंद ने यहाँ आकर जब भी हाथ फैलाकर जो माँगा उसे इस कुंड ने दिया है।यहाँ के पुरोहित अनुपम महाराज बताते है कि इस कुंड लेकर बहुत से मान्यताएं है। वे बताते है कि इस कुंड से गरीब लोग जरूरत के हिसाब से बर्तन मांगते थे और इस बर्तन को अपने यहाँ शादी विवाह, उत्सव में प्रयोग करते थे। प्रयोग करने के बाद वे बर्तन को लौटा देते थे। लेकिन कुछ समय बाद अराजक लोग इस बर्तन को नहीं लौटाने लगे। वे बर्तन को गायब करने लगे है। इस माया शक्ति को चुनौती देने लगे है। जिसके कारण माया शक्ति विलुप्त होने लगी। जो यहाँ की बावली है उसकी पूजन भी विलुप्त होने लगी थी। चूंकि नए सनातनी धर्म से जुड़े लोग विशेष प्रकार से नाग देवता का पूजन करते है एवं गाय के शुद्ध दूध से अभिषेक किया जाता है। जिससे नाग देवता बहुत प्रसन्न होते है और कंतित वासियो सहित विश्व के सभी लोगो का रक्षा करते है।वे आगे बताते है कि वर्ष में एक बार नाग पंचमी को विशेष पूजन का आयोजन कराया जाता है। जिससे लोगों को नाग देवता का आशीर्वाद का प्रदान करवाया जा सके। इस दिन बड़े धूमधाम से पूजन कराया जाता है।कर्णावती नदी से लेकर ओझला तक का स्थान पुरातात्विक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है कई ऐतिहासिक स्थान है । जिनकी खुदाई करने पर काफी इतिहास कुछ मिल सकता है ।लेकिन न तो पुरातात्विक विभाग और न ही शासन प्रशासन का ही ध्यान इस कुंड की ओर जा रहा है ।आपको हमारी यह ख़बर कैसी लगी हमें कॉमेंट करके बताइये और इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए।
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