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वायरल न्यूज़

संदेहजनक परिस्थितियों में झुलसी विवाहिता की मृत्यु

मिर्ज़ापुर। देहात कोतवाली क्षेत्र के हनुमान पड़रा गांव में सोमवार की देर शाम संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने से झुलस गई थी।...

मिर्ज़ापुर जिले में 200 कोरोना संदिग्ध, 84 को किया गया क्वारंटाइन तो 2 का चल रहा इलाज़

निजामुद्दीन से आये तब्लीगी जमात के जुड़े लोगों से पूरे हिदुस्तान में कोरोना तीसरी स्टेज पर पहुँच गया वहीं मिर्ज़ापुर जिलेभर में...

मिर्ज़ापुर में कोरोना के कारण भुखमरी का शिकार हुए बंदर

इस समय पूरी दुनिया वैश्विक महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस के प्रकोप से देश के साथ-साथ विंध्य नगरी काफी भयभीत...

मिर्ज़ापुर में मां की अर्थी को नहीं दे पाए कंधा,लाकडाउन के कारण

इस वक़्त पूरी दुनिया इस महामारी के चपेट में हैं लोग अपनों से दूर अपने-अपने घरों में बन्द हैं और इसी वजह...

कोरोना ब्रेकिंग: जमातियों के संपर्क में आए छह को घर में किया आइसोलेट

मिर्ज़ापुर के अहरौरा क्षेत्र के बसाढ़ी गांव में कोरोना पॉजिटिव युवक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार गांव के छह लोगों को...

अप्रैल के अंत तक चरम पर पहुंच सकता है कोरोना का कहर, तब्‍लीगी जमात ने कोशिशों पर फेरा पानी!

तब्‍लीगी जमात की करतूतों के कारण कारण का कहर लंबा खिंच सकता है। भारत में इसका पीक अब अप्रैल के अंतिम हफ्ते...

वीडियो वायरल हुआ और पुलिस ने डाला जेल के अन्दर

सोशल मीडिया हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुका है ऐसे में हम ख़बरों और सूचनाओं के लिए भी सोशल...

साधन नहीं मिला तो ठेले पर ले गए मरीज

देश विदेश यह विश्व्यापी लॉकडाउन के चलते गाड़ी मोटरों की आवाजाही पर काफी पअसर पड़ा है ऐसे में किसी के जीवन को...

Mirzapur Corona Update : निजामुद्दीन की तब्लीगी जमात से लौटे 23 लोग

निजामुद्दीन के धार्मिक जलसे में भाग लेकर मिर्जापुर जिले में 23 लोग लौटे हैं। इन सभी लोगों को नगर के दो मस्जिदों...

Must Read

ज़्यादा Mobile उपयोग करने वाले हो जाये सावधान, कटवाना पड़ सकता है हाथ

देश-दुनिया : वैश्वीकरण के दौर में पूरी दुनिया मोबाइल (Mobile) और इंटरनेट पर आ सिमटी है। जी हाँ लोग आजकल सोने के...

Modi Government का ऐलान, बाइक पर पीछे बैठने वाले हो जायें सावधान

देश : पिछले साल केंद्र सरकार (Modi Government) मोटर वाहन संशोधन लागू करके खूब सुर्खियाँ बटोरी थी। इस विधयेक में जुर्माना 5...

मिर्ज़ापुर की ढाई हजार साल पुरानी Nagvanshi बावली का अस्तित्व खतरे में

मिर्ज़ापुर की ढाई हजार साल पुरानी NAGVANSHI बावली का अस्तित्व खतरे में।मिर्ज़ापुर : बचपन में हम लोगों ने लकड़हारे और उसकी कुल्हाड़ी वाली कहानी ज़रूर पढ़ी या सुनी होगी। लेंकिन ऐसी ही एक कहानी वास्तविकता में विद्यमान है। ये कहानी मिर्ज़ापुर के कांतिपुर गाँव की है। करीब ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व इस गाँव के नागवंशी राजा ने नाग कुंड बनवाया था । वर्तमान में यह स्थान कंतित के नाम से जाना जाता है, इस कुंड बावन घाट के बावली से जाना जाता है। इस प्रसिद्ध नागकुंड के बारे में ऐसा मानना है कि जब कोई भी गरीब व्यक्ति अपने जरूरत के समय इस कुंड के पास आकर प्रार्थना करता था तो इस कुंड से बर्तन से भरी वस्तु प्रकट हो जाती थी।यहाँ के लोगो का मानना है कि नाग पंचमी के दिन इस कुंड में नहाने से सभी प्रकार से दुःख दर्द से निजात मिलता है। नाग पंचमी के दिन घाट का प्रांगण पूजा पाठ, वैदिक मंत्रों से गूंजते रहता है। लेकिन इस पुरातात्विक, धार्मिक व ऐतिहासिक कुंड का अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।क्या है पूरा इतिहास इस कुंड का।बताया जाता है कि प्राचीन कांतिपुर जो मिर्ज़ापुर के पास स्थित है जिसे अब कंतित के नाम से जाना जाता है। ये नागवंशियों के राज्य की राजधानी हुआ करता था । करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व कांतिपुर गाँव के नागवंशी राजा ने इस नागकुंड को बनवाया था । यहाँ से कुछ दूर पर ही विन्ध्याचल पर्वत और माँ गंगा के संगम पर स्थित है। इतिहासकार बताते है कि आराध्य देवी माँ विंध्यवासिनी की पूजा अर्चना करने के पहले नागवंशी इसी पवित्र कुंड में स्नान करते थे ।कुंड में स्नान करने के लिए चारों तरफ से सीढियाँ बनायीं गयी हैं। प्रत्येक ओर से सीढियों का निर्माण कर कुंड के अन्दर बावन घाट बनाये गये है । जिसके कारण इसका नाम बावन घाट की बावली भी पड़ गया है। कुंड में पानी के लिए तलहटी में पांच कुएं हैं। इसमें स्नान करने से सभी दुःख दर्द एवं मनोकामना की गयी फल की प्राप्ति होती है। ऐसा मानना है कि जब भी किसी जरूरत मंद ने यहाँ आकर जब भी हाथ फैलाकर जो माँगा उसे इस कुंड ने दिया है।यहाँ के पुरोहित अनुपम महाराज बताते है कि इस कुंड लेकर बहुत से मान्यताएं है। वे बताते है कि इस कुंड से गरीब लोग जरूरत के हिसाब से बर्तन मांगते थे और इस बर्तन को अपने यहाँ शादी विवाह, उत्सव में प्रयोग करते थे। प्रयोग करने के बाद वे बर्तन को लौटा देते थे। लेकिन कुछ समय बाद अराजक लोग इस बर्तन को नहीं लौटाने लगे। वे बर्तन को गायब करने लगे है। इस माया शक्ति को चुनौती देने लगे है। जिसके कारण माया शक्ति विलुप्त होने लगी। जो यहाँ की बावली है उसकी पूजन भी विलुप्त होने लगी थी। चूंकि नए सनातनी धर्म से जुड़े लोग विशेष प्रकार से नाग देवता का पूजन करते है एवं गाय के शुद्ध दूध से अभिषेक किया जाता है। जिससे नाग देवता बहुत प्रसन्न होते है और कंतित वासियो सहित विश्व के सभी लोगो का रक्षा करते है।वे आगे बताते है कि वर्ष में एक बार नाग पंचमी को विशेष पूजन का आयोजन कराया जाता है। जिससे लोगों को नाग देवता का आशीर्वाद का प्रदान करवाया जा सके। इस दिन बड़े धूमधाम से पूजन कराया जाता है।कर्णावती नदी से लेकर ओझला तक का स्थान पुरातात्विक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है कई ऐतिहासिक स्थान है । जिनकी खुदाई करने पर काफी इतिहास कुछ मिल सकता है ।लेकिन न तो पुरातात्विक विभाग और न ही शासन प्रशासन का ही ध्यान इस कुंड की ओर जा रहा है ।आपको हमारी यह ख़बर कैसी लगी हमें कॉमेंट करके बताइये और इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए।
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