बेचू वीर बाबा की समाधि पर उमड़ती है लाखों लोगों की भीड़, फिर लगता है भूतों का मेला

बेचू वीर बाबा की समाधि पर हर साल तीन दिवसीय मेला लगता है। यहां लोग माथा टेक कर अपनी मन्नतें मांगते हैं, यहां पर माथा टेकने से भूत प्रेत से निजात मिल जाती है।

 
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हर साल 3 दिन के मेले में लगता है, भूतों का मेला।

मिर्ज़ापुर, Digital Desk: कोन थाना क्षेत्र में मिश्री गांव में बेचू वीर बाबा की समाधि स्थल है। जहां पर भूतों का मेला लगता है, हर साल यहां तीन दिवसीय मेला लगता है। जहां पर लोग बाबा की चौखट पर अपना माथा टेकते हैं एवं मन्नत मांगते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर माथा टेकने से भूत प्रेत से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

इस मेले में इंसान के साथ-साथ  भूत, प्रेत, डायन का भी जमावड़ा लगता है। कथित तौर पर भूत, डायन और चुड़ैलों से यहां मुक्ति दिलाई जाती है। यह मंदिर लगभग 350 साल पुराना है एवं केवल उत्तर प्रदेश से ही नहीं बल्कि झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से भी तमाम श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए आते हैं एवं भूत, प्रेत से निजात पाते हैं। खास बात यह है कि, यहां फरियादी तो इंसान होते हैं लेकिन अब ग्रामीण वाले कहते हैं कि, उनपर भूत चुड़ैल डायन का कब्जा है। लोगों का मानना है कि बाबा वीर के समाधि की देखभाल उनके वंशज करते हैं। ऐसी मान्यता है कि बेचू वीर भगवान शंकर की साधना में हमेशा लीन रहते थे एवं परम योद्धा लोरिक उनके भक्त थे।

भूतों की महफ़िल:

बेचू बीर बाबा की समाधि पर आपको अंधविश्वास के कई रूप देखने को मिल सकता है। यहाँ भूतों का मेला लगता है जिसे देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे। दावा किया जाता है कि यहां पर भूत डायन और चुड़ैल से पीड़ित लोगों को मुक्ति दिलाई जाती है। कोई कहता है कि, पड़ोसी ने सर पर भूत बैठा दिया है, या किसी को भूत ने पकड़ लिया है और अब उसपर हावी हो गया है।

ऐसी कई सारी समस्याओं से निजात पाने के लिए लोग बेचू बीर बाबा के समाधि पर जाते हैं। इस समाधि में हर वर्ष तीन दिवसीय मेला लगता है, यहां पर लाखो लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं एवं भूत प्रेत से छुटकारा पाते हैं।

लोरिक थे परम् भक्त:

बेचू बीर भगवान शंकर की साधना में हमेशा लीन रहते थे। परम् योद्धा लोरिक भेजूं वीर बाबा के परम भक्त हुआ करते थे, वे दोनों एक बार इस घनघोर जंगल में ठहरे हुए थे और रोज़ की तरह बेचू बीर भगवान शिव की आराधना में लीन थे। तभी उनपर एक शेर ने हमला कर दिया, 3 दिनों तक यह युद्ध चला और अंत में बाबा ने अपना प्राण त्याग दिया और उसी जगह पर बेचू बीर बाबा की समाधि बना दी गई, तब से यहां हर वर्ष 3 दिनों का मेला लगता है।

प्रशासन व्यवस्था:

इस मेले में इतने लाखों लोग आते हैं कि यहां की जिम्मेदारी प्रशाशन पीएसी को दे देता है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और पीएसी दोनों को लगाना पड़ता है।