Pradosh Vrat 2021: कब है भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत, जानिए प्रदोष काल में क्यों की जाती है भगवान शिव की पूजा

मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है एवं यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है।

 
image source : boldsky
पंचांग के अनुसार हर त्रयोदशी का प्रदोष काल में पूजा मुहूर्त अलग होता है। वैसे आपको बता दें कि सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पूर्व के समय को प्रदोष काल कहते हैं।


Digital Desk: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। इस बार दिसंबर में प्रदोष व्रत 16 दिसंबर के दिन पड़ रहा है। कहा जाता है कि प्रदोष व्रत की पूजा सदैव प्रदोष काल में ही करनी चाहिए। इसीलिए इस दिन व्रत करने और भगवान शिव की पूजा करने से आरोग्य मिलता है। केवल इतना ही नहीं शत्रु का नाश होता है, पुत्र की प्राप्ति होती है और धन संबंधित मसलें भी हल होते है।

2

महत्व:

ऐसी मान्यता है कि दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का अलग महत्व रहता है और उसी अनुसार आपको फल भी मिलता है। इस बार गुरुवार के दिन यह प्रदोष व्रत पड़ रहा है, इसलिए इसका नाम गुरु प्रदोष व्रत है। यह तो सभी जानते हैं कि प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय ही भगवान की पूजा करनी चाहिए। लेकिन क्या इसके पीछे का कारण जानते हैं?

Mirzapur Official

दरअसल, पौराणिक ग्रंथों के अनुसार हर महीने त्रेशादशा तिथि को भगवान शिव सायंकाल के समय प्रदोष काल में कैलाश पर्वत पर अपने रजत भवन में प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं। मान्यता तो ऐसी ही कि जिस समय भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, उसी समय उनकी पूजा करनी चाहिए, ऐसा करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है। इसी वजह से हर त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

1

प्रदोष काल:

पंचांग के अनुसार हर त्रयोदशी का प्रदोष काल में पूजा मुहूर्त अलग होता है। वैसे आपको बता दें कि सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पूर्व के समय को प्रदोष काल कहते हैं। इसी काल में भगवान शिव नृत्य करते हैं और प्रसन्न होते हैं। इसीलिए इसी समय हमेशा पूजा करनी चाहिए ताकि मनचाहा लाभ मिल सके।

पूजा विधि:

• व्रत के लिए 1 दिन पूर्व से ही सात्विक रहे।

• मांस मदिरा का सेवन न करें, व्रत के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहने एवं शिव भगवान का संकल्प करें।

• इसके बाद पूजा घर को साफ करें और भगवान शिव की नियमित पूजा करें। दिनभर फलाहार पर रहे हैं और शाम के समय किसी शिव मंदिर जाकर या घर में ही पूजा करें।

• पूजा करने का सही समय शाम को 5:27 से लेकर रात 8:11 तक ही है। इसीलिए इसी बीच भगवान शिव की पूजा करें।