Mirzapur News: फ़र्ज़ी गोली कांड: बड़ी चालाकी से रची थी आदमी ने खुद को गोली मारने वाली कहानी, मिर्ज़ापुर पुलिस ने किया झूठी शिकायत का भांडाफोड़

Mirzapur पुलिस को करनपुर फर्जी गोलीकांड में एक बड़ी सफलता मिली, जब पुलिस ने यह सच पता लगाया कि गोली लगने वाला व्यक्ति ही असल आरोपी था।

 
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Mirzapur News : जानिए कैसे हुआ मामले का भंडाफोड़?


मिर्ज़ापुर, Digital Desk: बुधवार 12 जनवरी को एक स्टांप विक्रेता ने मिर्ज़ापुर पुलिस के समक्ष एक तहरीर लिखवाई की कुछ लोगों ने उसे करनपुर घाटी मिलट्री कंपाउंड के सामने रोक लिया और उसके पैर पर गोली मारकर उसके पास से ₹375000 की धनराशि लूट कर भाग गए। तीन बदमाशों ने पहले उसे रोका और उसके पास से उसका बैग छीन लिया। लाल बाबू बिंद ने पुलिस के सामने यह कहानी बनाई कि, जब वह बदमाशों से विरोध करने लगा तो बदमाशों ने उसके पैर पर गोली मार दी और उसका पैसा लेकर अपाचे बाइक से भाग निकले। फिर लालबाबू ने अपने परिवार वालों को इस घटना के बारे में सूचित किया। यह शिकायत लालबाबू ने मिर्ज़ापुर (Mirzapur) पुलिस के सामने लिखवाई थी। मिर्ज़ापुर पुलिस ने इस मामले की जांच पड़ताल करना शुरू किया, लेकिन जब लाल बाबू अपनी तहरीर दर्ज करा रहे थे, तभी कुछ बातों को लेकर मिर्ज़ापुर पुलिस को उसकी बात पर शक होने लगा।

पुलिस ने किया भंडाफोड़:

पुलिस ने इस मामले का भंडाफोड़ (Mirzapur Fake Loot Case) कर दिया है और अब सच सबके सामने है। पुलिस के मुताबिक लालबाबू (Mirzapur Fake Loot Case) ने ही इस घटना को अंजाम दिया है और झूठी कहानी बनाई थी। पुलिस को लालबाबू पर तब शक हुआ जब उसने पुलिस के सामने यह बात कही कि, उसके पास से करीब ₹375000 लूट लिए गए है, इस घटना के वक्त लाल बाबू का मोबाइल फोन उसके घर पर था, इस बात को लेकर पुलिस को उसपर शक हुआ। दूसरी बात जो पुलिस टीम के दिमाग में खटकने लगी वह यह थी कि, जब पुलिस पूरी फोर्स के साथ वारदात वाली जगह पर गई थी, तो वहां पर कट्टा और उसके कारतूस वहीं पर पड़े हुए थे। ऐसे में पुलिस को लाल बाबू की बात पर फिर शक होने लगा। लाल बाबू को गोली लगी थी, इसलिए पुलिस ने अपना फ़र्ज़ निभाते हुए पहले उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे वाराणसी ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया था।

पुलिस ने जब लालबाबू से थोड़ी सख्ती से सवाल-जवाब किया, तब लाल बाबू ने सच स्वीकारा कि, इस पूरी घटना को उसी ने अंजाम किया है। उसका पैसा किसी ने नहीं लूटा और किसी प्रकार का धन इससे संबंधित नहीं है, यानी धन की कोई चोरी हुई नहीं, यह सब एक मनगढ़ंत कहानी थी जिसे लालबाबू ने स्वयं रचा था। लालबाबू ने बताया कि अपनी जमीन बेचने एवं स्वयं के परिवार को जेल जाने से बचाने के लिए उसने इस घटना को अंजाम दिया। दरअसल, लाल बाबू का किसी व्यक्ति से जमीन विवाद को लेकर मुकदमा चल रहा था, जो वह हार गया था। यह जमीन लगभग 6 बिस्से की थी, ऐसे में लालबाबू इस घटना को अंजाम देकर उस व्यक्ति को फसाना चाहता था। लेकिन पुलिस ने थोड़ी सख्ती दिखाई तो उसने सच उगल दिया।

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कैसे आया कट्टा:

पुलिस से जब पूछा गया कि, उस व्यक्ति के पास कट्टा कहां से आया तो पुलिस ने बताया कि, जंगल के पास से ऐसा कुछ उसने बताया कि, उसे वहां से कट्टा मिला। लेकिन अभी वह जख्मी है, पुलिस एक बार फिर उससे पूछताछ करेगी। फिलहाल पुलिस उसके खिलाफ अपराधिक इतिहास को देखते हुए एवं अन्य मुकदमों के तहत कार्यवाही करेगी।

अंत में अपने गुनाह को कबूल करते हुए उसने बताया कि, श्याम लाल बिंद के खिलाफ षड्यंत्र करके, उसे फंसाने हेतु उसने यह सब माया जाल रचा था।