मिर्ज़ापुर निवासी अहमद हुसैन को Narendra Modi गाँधी मैदान बम धमाके मामले में हुई 10 साल की सज़ा, अन्य लोगों को फाँसी

27 अक्टूबर 2013 को नरेंद्र मोदी की जनसभा रैली में बम विस्फोट करने के मामले में 4 लोगों को फांसी सुनाई गई। वहीं अन्य लोगों को 10-10 साल की कारावास।

 
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मिर्ज़ापुर निवासी अहमद हुसैन ने बनाया था विस्फोटक बम।

मिर्ज़ापुर, Digital Desk: नरेंद्र मोदी पटना गांधी मैदान बम ब्लास्ट केस कल अपने अंतिम चरण में पहुंचा एवं जो लोग दोषी थे उन्हें सज़ा करार दी गई। 27 अक्टूबर 2013 को तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पटना के गांधी मैदान में एक जनसभा रैली कर रहे थे, जिसमें बम ब्लास्ट हुआ। वहां नरेंद्र मोदी को तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन मौजूदा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे और कुछ लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी।

एनआईए ने शक के बिनाह पर कई सारे लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनकी संख्या 100 के ऊपर ही होगी। एनआईए को खोज खबर करने में लगभग 8 वर्षों का समय लग गया, जिसमें वह हर अंतराल में किसी न किसी को छोड़ते रहते थे एवं सुनवाई होती रहती थी। ऐसे में एनआईए ने मिर्ज़ापुर के दो लोगों को भी गिरफ्तार किया था, जिनपर बम धमाके में सहयोग करने का आरोप था। दो में से एक यानी फखरुद्दीन को तो एनआईए ने निर्दोष साबित कर दिया एवं उसे उसके घर भेज दिया। लेकिन दूसरा व्यक्ति अहमद हुसैन को कल 10 वर्षों की सजा सुनाई गई एवं ₹10000 जुर्माना भी भरने को कहा गया।

कौन है अहमद हुसैन?

बम धमाके में अहमद हुसैन नाम के व्यक्ति को 10 साल की सजा सुनाई गई एवं उसे ₹10000 जुर्माना भरने को भी कहा गया। दरअसल, अहमद हुसैन मिर्ज़ापुर का निवासी है एवं बल्ली का अड्डा क्षेत्र में रहता था। अहमद हुसैन के पिता सिंचाई विभाग में लिपिक पद पर थे। सईद हुसैन ने अपने पुत्र अहमद हुसैन को दीनी तालीम के लिए पटना भेजा था। लेकिन दीनी तालीम सीखते-सीखते अहमद हुसैन आतंकवादियों के संपर्क में आ गया। जिसके बाद वह भी आतंकवादी बन गया। नरेंद्र मोदी की जनसभा रैली में जब उसका नाम सामने आया तो मिर्ज़ापुर जिले में हड़कंप मच गया। अहमद हुसैन को बम बनाने के मामले में दोषी करार पाया गया है एवं उसे 10 साल की सजा सुनाई है।

किस अंतर्गत मिली सज़ा?

मिर्जापुर निवासी अहमद हुसैन को कोर्ट ने विस्फोट अधिनियम के तहत 10 वर्षों के कैद की सजा सुनाई। वही उसे ₹10 हज़ार जुर्माना भरने को भी कहा गया। अहमद हुसैन पर आरोप है कि, उसने बम बनाने में सहयोग किया जिसकी वजह से कई लोग घायल हुए एवं कुछ लोगों की जान तक चली गई।

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अन्य लोगों को क्या सज़ा?

कोर्ट में पेश किए गए आतंकियों को उनके वकील द्वारा आर्थिक एवं परिवारिक स्थिति देखते हुए कम से कम सजा सुनाने की मांग की गई थी। लेकिन यह घटना कोई आम घटना नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने निष्पक्ष फैसला दिया। कोर्ट ने तो पहले चार व्यक्तियों को फांसी की सजा सुना दी, इसका मतलब कि उन्हें तब तक लटकाए रखा जाए जब तक उनकी मौत न हो जाए। उसके बाद अदालत ने इम्तियाज अंसारी पर ₹80000, वही हैदर अली, नोमान अंसारी और मोजीबुल्लाह अंसारी पर ₹90000 का जुर्माना लगा दिया।

इनके अलावा आतंकी उमेर सिद्दीकी, अज़हरुद्दीन कुरेशी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई एवं ₹60000 आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया। मिर्ज़ापुर के अहमद हुसैन को 10 साल की सजा एवं ₹10000 जुर्माना। वहीं अन्य लोगों को साथ 7 सालों की सजा एवं ₹10000 जुर्माना।

अगर उपरोक्त आतंकी जुर्माना भरने में नाकामयाब हो जाते हैं, तो उन्हें जेल में 1 महीने की सजा और काटनी होगी।

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कितने लोगों की गई थी जान?

पटना जनसभा रैली का खौफनाक मंजर देखकर वहां के लोग घबरा गए थे। उस पटना जनसभा रैली में जब बम विस्फोट हुआ, तो लगभग 89 लोगों के घायल होने की खबर थी, वही 6 लोगों की मृत्यु हो गई थी। हादसे के 8 वर्षों बाद, हादसे को अंजाम देने वाले 9 व्यक्तियों को कानूनी नियमावली के अनुसार सजा सुनाई गई।