बूढेंनाथ बाबा के मंदिर में अब नहीं इकट्ठा होगा गंदा पानी, रेन-वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का हुआ शुभारंभ

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की शुरूआत बूढ़े नाथ बाबा के मंदिर में शुरू कर दी गई है, जिसके लिए नारियल फोड़कर इसका शुभारंभ किया गया।

 
budhenath mandir mirzapur
1 महीने के अंदर तैयार हो जाएगा रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम।


मिर्ज़ापुर, Digital Desk: रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से अब जलाभिषेक का जल गंदे पानी में नहीं मिलेगा, बल्कि सीधे भूगर्भ में भेज दिया जाएगा। जी हां, यह एक बहुत ही अच्छा तरीका है जिससे पानी का दुरुपयोग नहीं होगा और बाद में हमेशा इसे अन्य कार्य के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसके लिए नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने मंगलवार को बूढ़ेनाथ मंदिर पर नारियल फोड़कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का शुभारंभ कर दिया है।

1

विस्तार:

बूढ़ेनाथ मंदिर सेवा समिति के सदस्य कई दिनों से शिवलिंग पर चढ़ाये जा रहे जल को गंदे पानी में रोकने के लिए एवं जलाभिषेक के जल को सीधा गंगा में मिलाने की मांग कर रहे थे। कई लोग कहते हैं गंगा में जलाभिषेक का जल मिलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तहत मंदिर पर चढ़ने वाले जल को भूगर्भ में भेज दिया जाएगा। प्राप्त सुचना के अनुसार इस कार्य को पूरा करने के लिए 1 महीने का समय लग जाएगा।

नगर पालिका अध्यक्ष ने बताया कि यह कार्य भक्तों की आस्था को देखते हुए बेहद जरूरी था। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के निर्माण का कार्य 1 महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद अब मंदिर पर भोलेनाथ महादेव पर भक्तों द्वारा किये जा रहे अभिषेक का जल गंदी नाली में नहीं जाएगा, बल्कि सीधे भूगर्भ में समा जाएगा। जिससे पानी की बचत होगी एवं गंदगी नहीं फैलेगी एवं भक्तों की आस्था भी बरकरार रहेगी।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग:

रेन वाटर हार्वेस्टिंग काफी समझदारी वाली प्रक्रिया है। दरअसल, जब बारिश होती है तो छत पर बारिश के पानी को स्टोर कर लिया जाता है और बाद में उसे दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। महाराष्ट्र एवं कई बड़े शहरों में इस प्रक्रिया को अपनाया जा चुका है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए लोग पानी इकट्ठा करते हैं और बाद में उसे अन्य काम के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसा ही इस मंदिर परिसर में होगा पानी गंदी नाली नहीं जाएगा बल्कि उसे भूगर्भ में भेज दिया जाएगा।

image: livehindustan