Good News : फिर से गूँज सकता हैं घंटाघर से घड़ी का घंटा, Clock Tower Mirzapur

"अपना टाइम आयेगा" - घंटाघर, मिर्ज़ापुर
 
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जिसने पूरे देश का टाइम सेट किया, अब उसके टाइम को सेट करने की बारी

मिर्ज़ापुर ऑफिशियल की अपील : 90 के दशक में जन्में लोग शायद आखिरी पीढ़ी हैं जिन्होंने घड़ी की टन-टन सुनी हो इसके बाद के बच्चों की भावनात्मक जुड़ाव घड़ी से तुलनात्मक रूप से कम ही होगी अतः परिश्रम और प्रयास से तस्वीर बदलने में सहयोग के रूप में आपसे समर्थन अपेक्षित हैं। 

clock tower mirzapur

आप सभी को मालूम होगा भारत का मानक समय मिर्ज़ापुर से लिया गया हैं किताबों में ये प्रयागराज के समीप नैनी से ली गयी बताई जाती है, जिसकी वजह है विकास के पथ पर मिर्ज़ापुर का धीमा रफ्तार और इसका कम चर्चित होना। एक ओर जहां हमारा शहर हमारे देश को घड़ी देखने में मदद करता है, वहीं दूसरी ओर यहाँ के मशहूर घंटाघर की घड़ी को ख़राब हुए लगभग 2 दशक हो चुके हैं।
 


नगर पालिका परिषद मिर्ज़ापुर से हालिया बयानों के परिणाम स्वरूप कहा जा सकता है कि घड़ी बनने की आखिरी उम्मीद भी अब धीरे-धीरे ठंडी पड़ रही है। ऐसे में टीम मिर्ज़ापुर ऑफिशियल की ओर से एक प्रयास की गई जिसके तहत हमने एक भारतीय व चार बहुराष्ट्रीय कंपनियों से बात की और इस नतीजे पर पहुंचे कि घड़ी को नई तकनीक के साथ फिर से शुरू किया जा सकता है।

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मिर्ज़ापुर ऑफिशियल की ओर से गिरीश पांडेय ने हैदराबाद स्थित एक कंपनी से बात की कंपनी के प्रतिनिधि के मुताबिक मिर्ज़ापुर के घंटाघर की घड़ी नई तकनीक के साथ कम खर्च में भी शुरू किया जा सकता है। यह नई घड़ी जीपीएस प्रणाली पर आधारित होगी। मिर्ज़ापुर के पत्थर की इमारत व नायाब नक्काशी के साथ नई तकनीक का तड़का लगेगा तो एक ऐतिहासिक बदलाव देखा जा सकता है।

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इस बारे में टीम मिर्ज़ापुर ऑफिशियल जल्द ही नगर पालिका परिषद मिर्ज़ापुर के अध्यक्ष मनोज जयसवाल सहित अन्य अधिकारियों से भी बात करेगी साथ ही टीम ने शहरी विकास मंत्रालय को इस बारे में पत्र लिखकर घड़ी के पुनर्निर्माण के लिए कदम उठाने की अपील की है।

कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि उन्होंने सिकंदराबाद में ऐसी ही एक घड़ी जोकि डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है का पुनर्निर्माण कर उसे नया स्वरूप दिया है जिसका वीडियो नीचे है। 

अब तक ये घड़ी महज चुनावी दंगल में पार्टियों द्वारा असफ़लता के उदाहरण मात्र के तौर पर प्रयोग की जाती हैं। मिर्ज़ापुर के घंटाघर प्रांगण स्थित घड़ी का भी पुनर्निर्माण यदि हो जाय तो यह किसी उपलब्धि से कम न होगी। 


क्या हैं घंटाघर की घड़ी की खासियत? 

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ये घड़ी मिर्ज़ापुर के पत्थर से बनायी गयी इमारत का हिस्सा है जिसमें बेहद महीन व खूबसूरत नक्काशी की गयी हैं। घड़ी को Mears and Stain Bank Limited नामक कंपनी ने 1891 में बनाया था। ये कंपनी 1965 में सम्भवतः बन्द कर दी गई हैं। ऐसा कहा जाता हैं ये घड़ी गुरुत्वाकर्षण के शक्ति से चलती थी और इसके घण्टे की आवाज लगभग 15km तक सुनाई पड़ती थी। सन् 2002 के आस-पास घड़ी ने धीरे धीरे काम करना बंद कर दिया था जिसके बाद से ये घड़ी बस चुनावी वादों में जिंदा होने की उम्मीद लगाए हैं।

अब सवाल ये है कि क्या घंटाघर भी कह सकेगा "अपना टाइम आयेगा!"