क्या हाल है मिर्ज़ापुर? एक नज़र ज़मीन की ज़मीनी हकीकत पर

क्या आपके मोहल्ले में भी जलजमाव और गड्ढों की समस्या है?
 
mirzapur news
नगरपालिका अध्यक्ष ने कमर कस ली है पर कितनी ? ये देखने योग्य है।


मिर्ज़ापुर : नगर में सड़क के साथ गड्ढे हैं, गड्ढों में गंदा पानी, गंदे पानी में मच्छर है यानी कि डेंगू की दावत है। अगर हमारा यह दवा आपको गलत लगे तब किसी भी सड़क पर 100 मीटर पैदल जायें और खुद देखें या हमसे दर्जनों तस्वीरें प्राप्त करें उत्तर प्रदेश में डेंगू का प्रकोप जारी है ऐसे में स्वास्थ्य महकमे की कलई एक-एक कर खुल रही हैं।

हमारा अपना शहर मिर्ज़ापुर भी कुछ ज़्यादा ठीक हाल में नहीं है, शहर के दो जनप्रतिनिधि एक दूसरे से पदोन्नति के लिए रस्साकशी कर रहे हैं इसकी चौराहे चट्टी पर काफी चर्चा भी है पर इस रस्साकशी में जनता की परेशानियों पर दोनों का ही कितना ध्यान जा रहा है यह अपने आप में बड़ा प्रश्न है।

डेंगू रोकथाम के लिए नगर पालिका परिषद मिर्ज़ापुर के अध्यक्ष ने तमाम राग अलापा पर वास्तविक सच्चाई ग्राउंड जीरो पर दिखती है देखते हैं मिर्ज़ापुर में डेंगू रोकथाम की तैयारियों का जायजा... कुछ ही दिन पहले नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने नगर की सड़कों और गलियों में जमा पानी हटाने और फागिंग कराने को लेकर अपनी तैयारियों का रिपोर्ट दिया था, लेकिन करीब से देखने पर वे दावे खोखले ही नजर आते हैं।

दरअसल नगर के हर सड़क, हर गली की हाल बद से बदतर ही दिखाई पड़ती है। एक ओर जहां अमृत योजना के अंतर्गत गलियों को खोदकर खराब हाल में महीनों से छोड़ दिया गया है, वहीं दूसरी ओर गंदी बजबजाती नालियाँ और कूड़े के अंबार बीमारियों के अनुकूल माहौल बनाए हुए हैं। नगर के प्रमुख चौराहों पर सड़कों के किनारे या तो जलजमाव हैं या तो कीचड़ और कूड़े का अंबार है जो कि मच्छरों और मक्खियों के पनपने की मुख्य स्रोत है।

gurhatti mirzapur

नगर के गुडहट्टी चौराहे पर सड़क के किनारे छोटे गड्ढों में गंदा पानी जमा है वही सड़क के किनारे स्थित मूत्रालय के दुर्गंध से आने जाने वालों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।


इसी सड़क के दूसरी तरफ मुकेरी बाजार चौराहे पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के अगल-बगल भयंकर गंदगी का अंबार है और साथ ही पार्क परिसर के बाहर जलजमाव, कूड़ा, सड़े गले फल व सब्जी आदि बारहो महीने फेके रहते हैं। जिससे स्थानीय नागरिकों को असुविधा होती है और मौजूदा हाल में डेंगू , मलेरिया, फाइलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
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रेलवे स्टेशन वार्ड में सरकारी बस अड्डे से लेकर स्टेशन के द्वार तक सड़क के किनारे कीचड़ और गंदे गजल का जमाव है जो कि लारवा पनपने के लिए बिल्कुल माकूल माहौल तैयार करता है यह तस्वीर अपने आप में नगर पालिका के दावे पर आईना दिखाती है।

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नगर के भटवा पोखरी बोर्ड की बात करें तो प्रसिद्ध प्रतिष्ठान सिटी कार्ट के पीछे की सड़क लगभग महीने भर से खोदी गई है वहां दशकों से दुर्गंध और गंदा पानी आम आदमियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इसी वार्ड में 2-3 वर्ष पूर्व सप्लाई के पानी में गंदा जलाने के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई थी और दर्जनों मंडलीय चिकित्सालय में बीमार हो कर भर्ती हुए थे। मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया पर तस्वीर ना बदली।

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बात महुवरिया की करें तो तो गंदे जलजमाव के लिए इस इलाके को प्रथम स्थान भी दिया जा सकता है वार्ड में एक पोखरा है जो कि नालियों के पानी से पूर्ण रूप से भरा हुआ है पोखरी से आने वाले की दुर्गंध और और पोखरी में पनपने वाले मच्छर बीमारी के वाहक के रूप में काम करते हैं साथ ही बी.एल.जे मैदान में जरा सी बारिश में पानी इकट्ठा हो जाता है जिस विषय पर हमारी ओर से पूर्व में भी ख़बर छपी है। 

नगर के कसरहट्टी वार्ड में अमृत योजना के तहत खोदे गए गड्ढे पूरी तरह से ढके नहीं गए। जिससे गड्ढों में पानी जमा हो गया और फिर वही कहानी यहां भी।  रमई पट्टी से जोगिया बारी वाली सड़क के विषय में नगरपालिका को कई बार लिखा जा चुका है स्थानीय नागरिकों ने जलजमाव सफाई और सड़क के लिए काफी संघर्ष किया पर अब तक नतीजा शून्य में ही है। 

वही विंध्याचल की बात करें तो स्थिति और भी बुरी हैं नालियों का पानी गली से बह रहा है रेलवे ब्रिज के नीचे गंदे पानी का जमाव है व किनारे कीचड़ यह तस्वीर वर्षों से ना बदली है।  असल में तो एक-एक कर सारे वार्ड की स्थिति एक ही है पर बातें बिल्कुल रामराज्य वाली हैं जिन मलिन बस्तियों का जिक्र नगर पालिका अध्यक्ष ने डेंगू रोकथाम योजना पर किया था उनकी स्थितियां और भी बदतर दिखती हैं ऐसे में सिर्फ वादों से डेंगू बचाव कैसे हो पाएगा?

अब बात स्वास्थ्य महकमे की करें तो तस्वीर बिल्कुल नहीं बदली जब वेंटीलेटर की जरूरत थी तो पर्याप्त मात्रा में वेंटिलेटर और वेंटिलेटर ऑपरेटर उपलब्ध न थे फिर ऑक्सिजन की जरूरत पड़ी तो ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार था अब डेंगू पर मोर्चा लेना है तो डेंगू जांच के लिए मंडलीय चिकित्सालय में व्यवस्था नहीं है यहां से सैंपल बनारस भेजे जा रहे हैं जिससे रिपोर्ट आने में एक-दो दिन का समय लग रहा है। 

जिस तरह से प्रदेश में डेंगू अब भी पांव पसार रहा है और गांव-गांव, गली-गली स्थितियां कमोबेश वैसी ही हैं ऐसे में आपको निजी दायित्व के साथ अपनी और परिवार की बीमारियों से रक्षा करनी चाहिए।

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