जानिए मिर्ज़ापुर की इस अनोखी विधानसभा सीट का पूरा इतिहास, समाजवादी पार्टी और बसपा का आज तक नहीं खुला खाता

मिर्ज़ापुर विधानसभा की मड़िहान सीट, जहां पर हुए है सिर्फ दो बार विधानसभा चुनाव। एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस की जीत, समाजवादी पार्टी और बसपा का खाता खुलना बाकी।

 
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मौजूदा समय में बीजेपी के रामशंकर सिंह पटेल यहां से विधायक है।

मिर्ज़ापुर, Digital Desk: मिर्ज़ापुर में जब भी चुनाव निकट आता है, तो विधानसभा चुनाव में जमकर हंगामा होता है एवं प्रत्याशियों के बीच होने वाली तू तू मैं मैं को लोग पसंद करते हैं। चुनाव आते ही मिर्ज़ापुर सीट पर सबकी नजर टिकी होती है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में यह एक अहम सीट है, इसीलिए यहा की सीट काफ़ी महत्वपूर्ण है।

मड़िहान सीट का इतिहास:

मड़िहान की बात की जाए तो यह सीट राजगढ़ विधानसभा का हिस्सा हुआ करती थी। लेकिन 2007 के बाद विधानसभा चुनावों में राजगढ़ विधानसभा परिसीमन को खत्म कर दिया गया और नई विधानसभा के तौर पर मड़िहान को बना दिया गया। राजगढ़ की बात की जाए तो इसे चुनार से अलग होकर 1962 में बनाया गया था। 1962 में होने वाले चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रामनाथ पाठक विधायक बने थे।

इस सीट पर पहली बार कमल गुलाब सिंह ने खिलाया था। जिन्होंने 1971 में विधानसभा चुनाव में विजय प्राप्त की थी। वहीं 1993 राम लहर के बावजूद जनता दल के राजेंद्र सिंह को यहां से विधायक चुने गए थे।

आज तक केवल 2 विधायक:

इसी पर अभी तक केवल 2 विधायक अपना कब्जा जमा पाए हैं। जब मड़िहान को राजगढ़ से अलग किया गया, तो पहली बार इस सीट पर कांग्रेस पार्टी के ललितेश त्रिपाठी ने अपना कब्जा जमाया। जिन्होंने सपा के सत्येंद्र कुमार पाल को हराया था, जो दूसरे नंबर पर थे। वहीं इस सीट पर दूसरी बार यानी कि 2017 विधानसभा चुनाव में रामशंकर सिंह पटेल ने बीजेपी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और यहां से विधायक चुने गए। इतना ही नहीं चुनाव जीतकर उन्हें उर्जा मंत्री भी बना दिया गया। ऐसी सीट पर अभी भी समाजवादी पार्टी और बसपा का खाता खुलना बाकी है।

आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।