UP Election 2022 : विधायक जिसने भतीजी की शादी में बनवाई थी सड़क, नगर के लगभग हर घर पहुँचा था आमंत्रण पत्र

RTO ने लगाए थे गम्भीर आरोप, डाक कर्मी से कथित मारपीट के दोषी सिद्ध हुए
 
kailash chaurasia mirzapur
स्थानीय राजनीति में राजनैतिक बकैतों ने इनको "पूडी-कचौडी" मंत्री कहना शुरू कर दिया था


मिर्ज़ापुर, डिजिटल डेस्क: UP 63 जिला मिर्ज़ापुर और 396 नगर विधानसभा की सीट हमेशा से प्रदेश की राजनीति में चर्चा में होती हैं। इसी सीट से साल 2002 में बिना किसी विशेष राजनीतिक पृष्ठभूमि के सपा ने एक संघर्षशील नेता को टिकट दिया था मकसद था वैश्य वोट में सेंध लगवाने का और कैलाश चौरसिया सफल रहें।

राजनैतिक सफ़र : 2007 और 2012 तक कैलाश चौरसिया का तिलिस्म कायम रहा था। इस दौरान वो बाल पुष्ट आहार और बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री जैसे बड़े पद सहित विधानसभा के कई कमेटियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य भी रहे। दी लल्लन टॉप में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अपने आखिरी कार्यकाल में बतौर मंत्री उनका जनसंपर्क बहुत ही तारीफों में रहा स्थिति ऐसी थी अमीर-गरीब सबके यहाँ कार्यक्रमों में पहुँचने के कारण स्थानीय राजनीति में राजनैतिक बकैतों ने इनको "पूडी-कचौडी" मंत्री कहना शुरू कर दिया।

मशहूर किस्सा : अपने 15 वर्ष के राजनीतिक कार्यकाल के दौरान उनकी संपत्ति में भी काफी बढ़ोतरी हुई जिससे विपक्ष हमेशा आड़े हाथों लेते रहा है। इनके कई होटल भारत के विभिन्न शहरों में संचालित हैं इसके साथ ही इन्हें सोने के कारोबार से भी जोड़कर मिर्ज़ापुर जिले में देखा जाता है। उनके कार्यकाल में हुए कामों के बारे में हर किसी की राय अपनी अलग हो सकती हैं पर मिर्ज़ापुर नगर के महंत शिवाला सड़क का निर्माण इनकी भतीजी की शादी के लिए रात-ओ-रात कराया गया था यह हमेशा चर्चा का विषय रहा, मजेदार बात की सड़क बरात के साथ ही विदा हो गई।

ये भी पढ़े:  पूर्व SP मंत्री Kailash Chaurasia के खिलाफ MP MLA Court द्वारा Warrant जारी, 22 नवंबर को होगा सुनवाई

आरोप और मुकदमें : इसके अलावा पूर्व मंत्री पर मिर्ज़ापुर के आरटीओ ने मारपीट का गंभीर आरोप लगाया था और चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट ने 1995 में डाक कर्मी से कथित मारपीट में इनको दोषी पाया और 7 सालों की सजा सुनाई थी।

मिर्ज़ापुर में कितनी मज़बूत पकड़: पार्टी में इनका कद कितना ऊंचा है कि मिर्ज़ापुर नगर के लिए समाजवादी पार्टी से कोई दावेदार भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आता है। मिर्ज़ापुर में इनकी लोकप्रियता में अभी भी कोई विशेष कमी नहीं आई है पर स्थानीय स्तर पर यह हमेशा हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर रहे हैं इनके ऊपर दबे स्वर में समुदाय विशेष के प्रति विशेष सॉफ्ट कॉर्नर होने का आरोप लगता है और 2017 चुनाव में इसका भारी खामियाजा भी उठाना पड़ा था ज्ञात हो कि पहली बार विधायक चुने जाने पर इन्होंने तमाम राजनैतिक पंडितों के जातिगत आंकड़े व भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए अपना धाक जमाया था।

विधानसभा चुनाव 2022 : अब आने वाले चुनाव में सपा की ओर से इनकी दावेदारी पक्की मानी जाती हैं पर कुछ दिनों से स्वास्थ्य कारणों से आम लोगों से संपर्क में नही थे और ना ही किसी सामाजिक कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे, जिससे सपा कार्यकर्ताओं में चिंता बनी हुई थी जिससे उनके राजनैतिक प्रतिद्वंदी भी नगर में बढ़ने लगे थे। हमारी ओर से आगामी चुनाव में इनको शुभकामनाएं।