मिर्ज़ापुर: महँगाई इतनी की सरकारी सुविधाएं भी हुई ठप, फिर मज़बूर हुआ गरीब किसान

पढ़िए हमारी खास रिपोर्ट जिसमें हम आपको बताएंगे कि सरकारी सुविधा मुहैया कराने जाने के बाद भी, महंगाई की मार गरीब वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ रही है। जिसके कारण वह फिर अपनी पुराना जीवन जीने पर मजबूर हो गए हैं।

 
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गैस है, पर महँगा चूल्हा जलाने का पैसा नहीं।
मिर्ज़ापुर, Digital Desk: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। जहां योगी आदित्यनाथ के पास डेवलपमेंट-विकास का मुद्दा है, वहीं अखिलेश यादव के पास बढ़ती हुई महंगाई की मार से गरीब वर्ग परेशान का मुद्दा है। ऐसे में इस बार चुनाव दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। लेकिन यह बात तो सत्य है कि, पिछले एक-डेढ़ साल में इतनी महंगाई बढ़ गई है कि, मिडिल क्लास फैमिली एवं गरीब वर्ग के लोग अब हर सुविधा प्राप्त करने के लिए मोहताज होते हुए नजर आ रहे हैं।

मंगाई की मार से यहां के लोग और किसान बेहद परेशान है। जब स्थानीय विधायकों से महंगाई की मार के बारे में पूछा गया, तो उनका कहना है कि पिछली सरकार वाली पार्टियों के किए गए मुद्दे को यह सरकार पूरा कर रही है, जिसके कारण हर काम को पूरा करने में विलंभ हो रहा है। नई सरकार आती है, तो वह नए वादे करती है एवं मौजूदा सरकार आती है, तो वह पुरानी सरकार के उदाहरण देकर समय माँगती है। ऐसे में नुकसान केवल गरीब लोगों का होता है और चक्की में जैसे गेहूं पिस्ता है, वैसे ही आम आदमी पिस्ता चला जाता है।

महँगा है गैस:

मिर्ज़ापुर के स्थानीय लोग इस बढ़ती हुई महंगाई से काफी परेशान है। मिर्ज़ापुर में कई सारे लोगों के घर में अब गैस के चूल्हे हैं, लेकिन उस चूल्हे में गैस भरने की भी वैसे गरीब वर्ग मैनेज नहीं कर पा रहा है। आपको बता दें कि, मौजूदा स्थिति में गैस के दाम ₹1000 हो गए हैं। इसलिए गरीब गैस नहीं ले पा रहा है, इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने इंडक्शन चूल्हा लिया। लेकिन जब बिजली का बिल ज्यादा आने लगा, तो उन्होंने इंडक्शन चूल्हा भी उठा कर ऱख दिया। ऐसे में अब उनके पास चूल्हा इस्तेमाल करने का करने के अलावा और कोई उपाय नहीं है। चूल्हे में खाना पकाने से धुँआ उड़ता है, इसके कारण स्वास्थ्य भी खराब होता है एवं सांस की तकलीफ भी हो सकती है। लेकिन बढ़ते हुए महंगाई को देखते हुए अब गरीब वर्ग इससे काफी परेशान है। वहां के निवासी बताते हैं कि उन्हें और बिजली तो जरूर मिली है, इस बारे में झूठ नहीं बोलेंगे लेकिन इसके अलावा भी उन्हें और कुछ नहीं मिला। वे लोग बताते हैं कि बिजली है लेकिन ज्यादा बिजली का बिल आने से वे बिजली का कम इस्तेमाल करते हैं। वही गैस के दाम इतने बढ़ गए है कि गैस का इस्तेमाल न करके उन्हें चूहे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

महँगाई से किसान भी त्रस्त:

महंगाई की मार गरीब पर के साथ-साथ किसानों पर भी पड़ रही है। इनकी सबसे बड़ी समस्या खेतों में सिंचाई करना है, खेतों की सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल होता है और 40 किलो धान पूरे साल सिंचाई करने में अगर वे नाकामयाब हो जाते हैं, तो उनका बहुत नुकसान होता है। किसान खेतों में खून पसीना बहा कर पूरे देश का पेट भरता है, लेकिन बढ़ती हुई महंगाई की मार से वह अपना पेट नहीं भर पा रहा।

वहाँ के स्थानीय किसान बताते हैं कि, उनपर इस वक्त बहुत बड़ा प्रेशर है। उन्हें खेती भी करनी है, बच्चों की पढ़ाई भी करानी है और उन्हें दो वक्त का खाना भी खिलाना है। ऐसे पर उनके सामने मजदूरी करने के अलावा और कोई काम नहीं बचता। किसान बता रहे है कि, गैस के दाम बढ़ने की वजह से हम गैस सिलेंडर नहीं भरवा पा रहे हैं और चूल्हे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

महँगाई के आगे योजनाएं ध्वस्त:

नगर के लोग बताते हैं कि सरकार की योजनाएं तो बहुत अच्छी है। लेकिन इन योजनाओं का फायदा महंगाई के कारण वे नहीं उठा पा रहे हैं। सरकार ने उन्हें गैस सिलेंडर प्रदान कराए, बिजली की सुविधा दी लेकिन अगर इन सब चीजों के दाम भी बढ़ा दिए जाएंगे, तो इन चीजों का इस्तेमाल कैसे करेंगे। पहले गैस सिलेंडर का दाम 600 से ₹700 के बीच होता था, लेकिन अब उसका दाम बढ़ कर हजार रुपए तक पहुंच गया है। बिजली के बिल में भी पर यूनिट इजाफा हो गया है, इसके बाद महंगाई की मार गरीब आदमी को ही पड़ रही है।

किसानों ने कहा कि, यहां पर गाय का इतना आतंक है कि सरसों और अरहर की फसल बर्बाद हो जाती है। किसान का कहना है कि सरकार को उन्हें बिजली का बिल कम कर देना चाहिए और डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए। किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड तो बना है, लेकिन बैंक वाले उन्हें दिनभर चक्कर लगवाते हैं। बैंक वाले किसान क्रेडिट कार्ड पर जबरदस्ती बीमा ले लेते हैं, जिसका हमें कोई लाभ नहीं मिलता। फसल का नुकसान हो जाता है।