अन्य प्रदेश में जाते है मिर्ज़ापुर के रेक्शहवा कोहड़ा, फिर इस कोहड़े से बनता है "मीठा पेठा"

मिर्ज़ापुर के कोहड़ो की डिमांड काफी ज़्यादा है। इसीलिए मिर्ज़ापुर के यह कोहड़े दिल्ली, पंजाब, मुम्बई तक जाते है।

 
कुम्हड़ा
रेक्शहवा कोहड़े से बनते हैं स्वादिष्ट पेठे।


मिर्ज़ापुर, Digital Desk: आयात-निर्यात के मामले में मिर्ज़ापुर की कमाई करोड़ों में हो जाती है। क्योंकि मिर्ज़ापुर के उत्पादित कई सारे प्रोडक्ट दूरगामी सफर तय करते हैं। पेठे का नाम आप सबने सुना ही होगा। आगरा में सबसे प्रसिद्ध पेठा ही है, लेकिन क्या आपको पता है कि मिर्ज़ापुर के रेक्शहवा कोहड़े बाहर अन्य प्रदेश में निर्यात किए जाते हैं, जिनसे बाद में बड़े स्वादिष्ट पेठे बनते हैं। ऐसे में इन कोहड़ो की डिमांड मार्केट में बहुत है, मिर्ज़ापुर के खास कोहड़े दिल्ली, पंजाब और मुंबई तक जाते हैं। इसलिए इनकी डिमांड बहुत ज्यादा है, यह कोहड़े ₹500 प्रति क्विंटल बेचते हैं और 50 से 60 क्विंटल का उत्पादन तो होता ही रहता है।

क्या है खास:

खास बात यह है कि पेठे का नाम सुनते ही आप सबके मुंह में पानी आ जाता है। यह ऐसी स्वादिष्ट पकवान है जो सबको पसंद आती है, ऐसे में पेठे को बनाने के लिए कोहड़ा और चीनी का इस्तेमाल होता है। चीनी के दाम बढ़ने की वजह से कोहड़ा का दाम कम होता जा रहा है। इससे किसानों के चेहरे पर मायूसी आ गई है, उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।

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इसलिए खरीदारी को व्यापारी कम कर रहे हैं, ऐसे में सरकार की तरफ से भी किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही है। कोन क्षेत्र में सोनकर बिरादरी के जुड़े दर्जनों किसान बड़े किसानों को रुपया देकर कोहड़ा की खेती वर्षों से करते चले आ रहे हैं। यह कोहड़े इतने खास होते हैं कि, इनके उत्पादन से ही पेठे बनाए जाते हैं। ऐसे में यह कोहड़े सुल्तानपुर, गाजियाबाद, कानपुर, नोएडा, आगरा, जौनपुर के अलावा अन्य प्रदेश जैसे पंजाब-हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात के व्यापारियों तक पहुंचाए जाते हैं।

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किसानों को हो रहा है नुकसान:

चीनी के दाम बढ़ने की वजह से कोहड़ा के दाम में कमी आ गई है। ऐसे में किसानों का निर्यात आयात में काफी नुकसान हो रहा है। एक किसान ने बताया कि, लागत के हिसाब से ₹500 प्रति क्विंटल कोहड़ा की बिक्री होनी थी। लेकिन चीनी महंगा होने के कारण व्यापारी कोहड़ा का उचित मूल्य नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है और कोहड़े रखे-रखे खराब होता जा रहा है, जिसे बाद में किसानों को फेंकना पड़ रहा है।

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अन्य सामान का आयात-निर्यात:

कोहडा के साथ-साथ मिर्ज़ापुर के में बने शतरंज, टमाटर और हरी मिर्च भी विदेशों तक निर्यात की जाती है। ऐसे में अन्य प्रदेश के साथ-साथ विदेशी मार्केट में भी इनकी जबरदस्त डिमांड है। अरे शतरंज प्रेमी खिलाड़ी तो मिर्ज़ापुर के लकड़ियों की बनाई हुई गोटियों से ही शतरंज खेलते हैं। इसलिए यह दुबई और जर्मनी तक भी निर्यात किए जाते हैं। मिर्ज़ापुर के टमाटर खाने में इतने स्वादिष्ट होते हैं कि, दुबई के मार्केट में भी यह दुर्घ टमाटर बिकते हैं। वहीं मिर्च की बात की जाए तो मिर्ज़ापुर की हरी-हरी मिर्च भी विदेशी मार्केट में बिकती है और नेपाल, श्रीलंका और भूटान जैसे देशों तक जाती है।