एक फुलकी खाने की इतनी बड़ी सजा? मिर्ज़ापुर के मास्टर ने कक्षा २ के बच्चे को छत से उल्टा लटकाया, सोशल मीडिया पर आक्रोश

मिर्जापुर के एक स्कूल से वायरल फोटो हम सबके सामने आई। जिसमें एक शिक्षक ने शरारत करने की वजह से बच्चे को छत से नीचे उल्टा लटका दिया।

 
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बच्चें को छत से उल्टा लटकाया, social media पर मास्टर के खिलाफ आक्रोश।

मिर्ज़ापुर, Digital Desk:  बताया जाता है कि माता-पिता के बाद अगर भगवान का किसी को दर्जा दिया जाता है, तो वह बच्चे का "अध्यापक" होता है। छोटी उम्र में बच्चा माता-पिता एवं अध्यापक की देखरेख में ही बड़ा होता है। इसलिए जैसा माता-पिता एवं अध्यापक करते हैं बच्चा वैसा ही सीखता है। शरारत करने पर मां-बाप और अध्यापक दोनों ही बच्चे को सजा देते हैं, लेकिन अगर सजा बच्चे की जान पर बनाए, तो यह बात आश्चर्यजनक है।

ऐसा ही एक आश्चर्यजनक मुद्दा मिर्जापुर जिले अहरौरा के एक विद्यालय में देखने को मिला। अहरौरा के सद्भावना शिक्षण संस्थान में बुधवार को शरारत करने पर मास्टर ने बच्चे को छत से उल्टा ही लटका दिया, जिससे बच्चे की हालत खराब हो गई। बच्चे के पिता ने विद्यालय के संचालक की इस हरकत पर आपत्ति दर्ज कराई। जिसके बाद अब पूरे इलाके में स्कूल के प्रति लोगों की नाराजगी है। क्योंकि अब पूरे प्रदेश में उल्टा लटकाने वाली, यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

यह बच्चा अहरौरा में रहने वाले अजीत सिंह यादव का पुत्र है। जिसका नाम सोनू यादव है, यह बच्चा कक्षा दो में पढ़ता है। इस विद्यालय के कुछ बच्चे बृहस्पतिवार को दोपहर में फुलकी खाने विद्यालय से बाहर चले गए, जिसपर बच्चों ने सोनू यादव पर यह आरोप लगाया कि वह सबसे धक्का-मुक्की कर रहा था। बच्चों ने सोनू की शिकायत स्कूल संचालक मनोज विश्वकर्मा से की। जिसके बाद संचालक ने बच्चे को समझाया, लेकिन मासूम बच्चा उनकी बात समझ न सका।

इसके बाद बौखलाते हुए स्कूल संचालक मनोज विश्वकर्मा ने बच्चे को विद्यालय भवन के बारजे से उल्टा लटका दिया। वायरल तस्वीर में आप देख सकते हैं कि, किस तरह मास्टर ने बच्चे को एक पैर से लटकाया हुए हैं। यह देखकर सभी बच्चे सन्न रह गए। इसके बाद संचालक के ऊपर शिकायत दर्ज कराई गई।

BSA द्वारा जाँच -

इसके बाद BSA के गौतम प्रसाद ने कहा कि इस मामले की जांच कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीएम प्रवीण कुमार जी ने कहा कि बीएसए को मामले की जांच के लिए मौके पर भेज दिया गया है। मामले को प्रथम प्राथमिकता के आधार पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।