जानिए कौन है धनंजय सिंह, 1998 में पुलिस ने किया था मृत्य घोषित, पुलिस अब कर रही है अनदेखा ​​​​​​​

आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश की मिट्टी से जन्म में एक बड़े नेता के बारे में जिनका नाम "धनंजय सिंह" है। जिन्हें पुलिस ने मृत्य घोषित कर दिया था और अब अनदेखा कर रही है।

 
image: jansatta

कागज़ों में धनंजय सिंह भगोड़ा घोषित।

उत्तर प्रदेश, Digital Desk: अजीत सिंह हत्याकांड में वांटेड बाहुबली नेता धनंजय सिंह का क्रिकेट खेलते हुए एक वीडियो वायरल होने के बाद लोग अब उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे हैं। अजीत सिंह हत्याकांड में वांटेड पूर्वांचल का बाहुबली धनंजय सिंह कागजों में तो भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। लेकिन असल जिंदगी में वह मौज मस्ती का जीवन व्यतीत कर रहा है और उत्तर प्रदेश में टॉप 25 माफियाओं में से एक पूर्व सांसद एवं विधायक जौनपुर में खुलेआम रह रहा है, वह भी बिना किसी डर के। धनंजय सिंह का क्रिकेट खेलते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को देखकर ही डीजीपी मुकुल गोयल ने जांच की मांग की है। 

विस्तार:

दरअसल, जौनपुर का बाहुबली नेता एवं पूर्व सांसद धनंजय सिंह 6 जनवरी 2021 को शाम राजधानी लखनऊ के विभूति खंड में कटौठी चौराहे पर आजमगढ़ के पूर्व ब्लाक प्रमुख अजित सिंह को गोलियों से भून कर हत्या के मामले में मोस्ट वांटेड है। इस हत्याकांड के बाद कानून व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े किए जा रहे हैं, इतना ही नहीं 8 आईपीएस अधिकारियों वाली लखनऊ पुलिस की टीम पर भी अब लोग सवाल उठा रहे हैं। हालांकि पुलिस ने इस घटना को एक साजिशकर्ता गिरधारी और डॉक्टर को ढेर कर दिया था। लेकिन विवेचना में सामने आए धनंजय सिंह के नाम पर सिर्फ कागजी कार्यवाही हुई और अब धनंजय की दबिश के लिए लखनऊ पुलिस एक बार फिर उसके घर गई थी। लेकिन बाहर से ही उसकी पत्नी ने अपना संदेश देकर उन्हें वापस जाने को कह दिया। अजीत सिंह हत्याकांड में पुलिस में धनंजय सिंह पर ₹25000 का इनाम भी घोषित किया है और सरेंडर करने के लिए घर पर नोटिस भी भेजी है।

धनंजय सिंह:

उत्तर प्रदेश की मिट्टी के जन्मे धनंजय सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत सन 2002 में की थी। धनंजय सिंह ने राजनीतिक पारी को शुरू करने से पहले माफिया वाली पारी भी खेली, जिसमें उनकी गिनती अब माफियाओं में होती है। धनंजय सिंह के ऊपर 1998 में ही 12 मुकदमे दर्ज हो चुके थे। इतना ही नहीं अजीत सिंह हत्याकांड के पहले धनंजय सिंह पर 26 आपराधिक मामले दर्ज हैं एवं मई 2018 में धनंजय को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा पर भी एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।

23 साल पहले कल्याण सिंह की सरकार में पुलिस को मुखबिर द्वारा एक सूचना मिली। जिसके चलते बदमाश धनंजय सिंह मिर्ज़ापुर रोड पर बने एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने की फिराक में है। स्थानीय पुलिस वहां दोपहर 11:30 बजे पहुंची और छापेमारी की, वहां पुलिस और धनंजय सिंह के आदमियों के बीच मुठभेड़ हुई और 4 लोग मारे गए। पुलिस ने बताया कि इन 4 लोगों में धनंजय सिंह भी शामिल था। इसके बाद 4 महीने तक धनंजय सिंह इधर-उधर छुपता रहा और अचानक फरवरी महीने में वह पुलिस के सामने पेश हुआ, तो पुलिस के फर्जी एनकाउंटर का राज खुला। धनंजय के जिंदा होने के बाद मानव अधिकार आयोग तक जांच पहुंच गई थी एवं 34 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए जिसकी जांच अभी तक चल रही है।

अभी का हाल:

पूर्व डीजीपी यशपाल सिंह ने बताया कि उन्हें इस बात पर हैरानी हो रही है कि धनंजय सिंह को कोर्ट से जमानत मिली थी, तब भी लखनऊ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पूर्व डीजीपी ने बताया कि लखनऊ पुलिस के पास इतने सबूत है कि, वह सबूतों के बिनाह पर धनंजय सिंह को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन पुलिस इस बात को अनदेखा कर रही है, तो इस मामले में मौजूदा पुलिस अधिकारियों को बयान देना चाहिए। अन्य पुलिस का भी मामला है कि इस मामले को अनदेखा नहीं करना चाहिए, लेकिन ऐसा ही हो रहा है।