Sonbhadra: सोनभद्र में प्रोफेसर ने ढूंढा अरबों साल पुराने जीवाश्मों, ख़बर पूरे विश्व में चर्चा का विषय

सोनभद्र में लगभग एक अरब 66 करोड वर्ष पुराना जीवाश्म मिला है। जिसे लखनऊ के एक विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ने खास खोजा है।

 
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लखनऊ के प्रोफेसर विभूति रॉय ने खोजा यह फॉसिल।

सोनभद्र, Digital Desk: लखनऊ विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर जिनका नाम विभूति राय है, उन्होंने दुनिया में के एक फॉसिल को ढूंढ निकाला है। जिसकी उम्र लगभग एक अरब 66 करोड़ 50 लाख़ होगी। यह दुनिया के सबसे पुराना मेगास्कोपिक फॉसिल है, जोकि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के चौपान तहसील के बारी गांव में मिला। 3 साल इस पर काम करने के बाद उनका यह शोध इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ अप्लाइड बायलॉजी के जनरल ऑफ एप्लाइड बायो साइंस में प्रकाशित हो रहा है।

फॉसिल पर खास जानकारी:

प्रोफेसर विभूति नारायण के मुताबिक विंध्यान अवसादी शैलों से निर्मित सोनभद्र का यह क्षेत्र 144000 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है। नवंबर 2018 में एक शोध के दौरान यहां ऐसी चट्टान देखी गई थी, जो बहुत ही पुरानी थी। यह ज्वालामुखी की राख से समुंदर के अंदर जनित हुई थी। इनमें से पोर्सलेनाइट चट्टान भी था, लैब में लगातार इसका परीक्षण किया जा रहा था। इसमें चट्टानों के बीच पाए जाने वाली शैलों में भूरे रंग की चित्तीदार मिलीमीटर मोटाई की आकृतियां देंखी, जब इनके नमूनों को माइक्रोस्कोप में देखा गया तो यह अति महत्वपूर्ण ग्राइपानियां स्पाइरलिस फॉसिल के साथ अन्य फॉसिल्स भी मिले जो लगभग हर वर्ष पुराने हैं। सबसे पहले चीन के गांव में लगभग डेढ़ अरब साल पुराने फॉसिल मिले थे।

क्या है तर्क:

कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भूविज्ञान विभाग के प्रशासनिक बटरफील्ड में लगभग वर्ष 2015 में अपने एक शोध के अनुसार पुराने फॉसिल्स का ज़िक्र किया था। प्रोफेसर साहब ने बताया कि, भारत में से कई सारे चट्टान है। जहां पर पुराने एवं कई और वह वर्ष पुराने कौशल मौजूद हैं, वहीं प्रोफेसर विभूति राय का यह कहना है कि, इस नई खोज से जीवन के विकास एवं पृथ्वी के आरंभिक जीवन के बारे में पता लगाया जा सकता है।