Gandhi Jayanti 2021: क्या Mahatma Gandhi के बिना मुमकिन थी, भारत की आज़ादी?, पढ़े पूरी ख़बर

इस वर्ष महात्मा गांधी की 152 वी जयंती मनाया जा रहे हैं। आइये अब बात करते हैं कि क्या महात्मा गांधी के बिना भारत की आजादी मुमकिन थी।

 
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सत्य और अहिंसा में विश्वास रखते थे महात्मा गांधी।


मुंबई, डिजिटल डेस्क: आप सब को यह कहानी पता होगा कि महात्मा गांधी विदेश से जब भारत लौट रहे थे, तो हमारे दोनों के साथ बड़ा ही बुरा व्यवहार किया और उन्हें ट्रेन से बाहर कर दिया। जिसके बाद महात्मा गांधी को बहुत ही बुरा लगा और उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में अपना सहयोग प्रदान करना शुरू कर दिया।

भारत के आजादी की लड़ाई तो सालों पहले शुरू हो चुकी थी। लेकिन महात्मा गांधी 1915 में भारत की आजादी में जुड़े। महात्मा गांधी का एक अलग ही तरीका था। महात्मा गांधी "सत्य अहिंसा परमो धर्म" में विश्वास रखते थे। महात्मा गांधी का मानना था कि मारपीट किए बिना और झूठ बोले बिना ही हम बड़ी से बड़ी लड़ाई लड़ सकते हैं और उसे जीत भी सकते हैं।

कुछ बात तो थी महात्मा गांधी में, की धोती पहने एक पतले दुबले आदमी के सामने पूरी की पूरी अंग्रेजी हुकूमत झुक गई थी। अंग्रेज जब महात्मा गांधी की बात नहीं मानते थे, तो महात्मा गांधी अलग-अलग तरीके से उन्हें अपनी बात मनवाने पर मजबूर कर देते थे। वह न अंग्रेजों से बात करते थे और नाही किसी प्रकार की अनुरोध करते थे। वह कभी दांडी मार्च तो कभी-कभी सत्याग्रह का एक नया तरीका शुरू कर देते थे, जिसे पूरा देश मानने लगा था। अंग्रेजों के मानना था कि अगर गांधी जी को कुछ हो गया, तो पूरा देश खड़े-खड़े अंग्रेजों को आग लगा देगा। उसके बाद अंग्रेजों को गांधी जी की बात पर झुकना ही पड़ा।

गांधीजी ने अंग्रेजों को भारत से निकाल कर ही दम लिया और भारत को एक नई पहचान दी। गांधी जी ने हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के तौर पर मान्यता दिलवाई। हर एक भारतवासियों को सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। आज भी भारत के कुछ निवासी पूरे दिल से उनके मन्त्र को मानते हैं।


इसलिए आज महात्मा गांधी को भारत के राष्ट्रपिता के तौर पर माना जाता है और उन्हें प्रेरणा के तौर पर देखा जाता है।