क्यों नेहरू से भी ज़्यादा लोकप्रय थे, Lal Bahudur Shastri?, जनता करती थी शास्त्री जी से बहुत प्यार, पढ़े पूरी ख़बर

लाल बहादुर शास्त्री ने अपने जीवन में महात्मा गांधी एवं जवाहरलाल नेहरू को अपना प्रेरणासोत्र माना था।

 
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11 जनवरी 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में हत्या हुई थी।

मुंबई, डिजिटल डेस्क: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन हम सब के लिए प्रेरणासोत्र है। लाल बहादुर शास्त्री जी देश के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिनके सामने अंग्रेज़ो तक को झुकना पड़ता था और यही कारण था कि लाल बहादुर शास्त्री जी को देश का हर एक निवासी बहुत ही प्रेम एवं सम्मान करता था।


आइये बात करते हैं लाल बहादुर शास्त्री जैसे महान व्यक्ति के कुछ महान किस्से:

आजाद होने के बाद भारत काफी स्ट्रगल कर रहा था। भारत अपने आप को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने का, हर अथक प्रयास कर रहा था। जिसकी वजह से अमरीका से पीएल 40 नाम का एक गेहूं भारत में आता था, जिसे वहाँ के जानवर तक खाना पसंद नहीं करते थे और अमेरिका उसे भारत को लगभग दुगने दाम में बेचा करता था। जिससे भारत को काफी नुकसान हुआ करता था। शास्त्री जी ने यह निर्णय लिया कि भले ही देश को हफ्ते में दो बार उपवास रखना पड़ेगा, फिर भी हम यह pl40 जैसा गेंहू नहीं खाएंगे, हम खुद खेती करेंगे और गेंहू का उत्पादन ज्यादा करेंगे, लेकिन उनका दिया हुआ गेंहू नहीं खाएंगे।


लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश को बचत करने का एक मूल मंत्र दिया, जो सबसे पहले गांधी जी ने सब को यह ज्ञान दिया था। बचत यानी भविष्य की कमाई, लाल बहादुर शास्त्री गांधीजी के सबसे बड़े फॉलोवर थे। उन्होंने देश को यह मूल मंत्र दिया लाल बहादुर शास्त्री जी के बड़े बेटे एक बार अंग्रेजी में फेल हो गए, लाल बहादुर शास्त्री अपने बेटे को पढ़ाने वाले मास्टर को घर आने से मना कर दिया और कहा कि देश में करोड़ों बच्चे पढ़ नहीं पाते, तो उसमें एक मेरा बेटा भी सही।

लाल बहादुर शास्त्री जी बड़ा ही साधारण जीवन जीना पसंद करते थे, उनके पास दो सेट कपड़े थे और उसे ही वह स्वयं धोते थे एवं पहनते थे।

लाल बहादुर शास्त्री जी के पास पैसे नहीं थे कि, वह तुरंत ही एक गाड़ी खरीद सकें। इसलिए उन्होंने किस्तों पर उस जमाने में लगभग हजारों रुपए की एंबेसडर गाड़ी खरीदी थी, जिसका धीरे-धीरे करके उन्होंने किस्त चुकाई।

11 जनवरी 1966 को जब लाल बहादुर शास्त्री पाकिस्तान के मुद्दे पर समझौता करने गए थे, तब पूरे भारत में उन्हें खो दिया और आज भी लाल बहादुर शास्त्री जैसे महान व्यक्ति की विचारधारा एवं सोच की इस देश में कमी है।