सैकड़ों वर्ष पुराना है हिमाचल प्रदेश में माता का यह मंदिर, मान्यता के अनुसार यहां मिलता है गुप्त रोगों से छुटकारा

हिमाचल प्रदेश में स्थित शीतला माता का मंदिर लगभग मुगल काल के दौरान बनाया गया था। इस मंदिर की एक अलग ही विशेषताएं एवं मान्यता है।

 
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जानिए क्या खास मान्यता है, इस मंदिर के बारे में।

हिमांचल प्रदेश, Digital Desk: हम सबको पता है कि हिंदू धर्म कितना महान है एवं हिंदू धर्म में जो भी भगवान है, उनकी अलग-अलग मान्यता है एवं विशेषताएं है। हिंदू धर्म में उपवास एवं कड़ी प्रतिज्ञा करने के बाद मनचाहा फल मिलता है। ऐसी मान्यता है और ऐसा सच में होता है, इसलिए लोगों का अपने भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा बनी रहती है। ऐसे में हिंदू धर्म में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जिनकी अलग मान्यता है एवं अलग विशेषता। कुछ मंदिर ऐसे है जहां पर आप को 15 से 16 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, और सच्चे मन से प्रार्थना एवं पूजा करने से आपकी सभी मुरादें पूरी होती है, जैसे वैष्णो देवी। कुछ मंदिर ऐसे होते हैं जहां पर जाते ही आपके सभी दुख समस्या दूर हो जाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि इन भगवान की पूजा करो तो नौकरी लग जाती है। कुछ लोग कहते हैं कि सोमवार का व्रत रखो तो अच्छा पति मिलता है। ऐसे में एक प्राचीन मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जिनकी मान्यता बड़ी ही खास है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है और यह शीतला माता का मंदिर है, जिसकी अलग की विशेषताएं एवं मान्यता है।

वर्षों पुराना मंदिर:

वैसे देखा जाए तो भारत के कोने कोने में ही कोई न कोई प्राचीन मंदिर स्थित है। लेकिन भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में एक ऐसा मंदिर है, जो अति प्राचीन है। यह मंदिर शीतला माता का है, हिमाचल प्रदेश के बड़सर क्षेत्र के गारली गांव में शीतला माता का एक ऐसा मंदिर है, जो सैकड़ों वर्ष पुराना है। इस मंदिर के निर्माण विषय में बताया जाता है कि, इसका निर्माण मुगल काल में हुआ था। यह मंदिर भक्तों की आस्था का विशेष केंद्र माना जाता है और इससे संबंधित कई कथाएं भी है, जिसके अनुसार माता शीतला को मां ज्वाला देवी की बहन माना जाता हैं।

गुप्त रोग से मुक्ति:

इस मंदिर की विशेष मान्यता यह है कि जो यह भक्त माता शीतला के प्रसाद का सेवन करता है उसे गुप्त रोगों से मुक्ति मिलती है। हर वर्ष फागुन महीने की अष्टमी को यहां मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु माता का दर्शन करने आते हैं एवं माता का प्रसाद ग्रहण करने के बाद उन्हें गुप्त रोग से छुटकारा मिल जाता है। बताया जाता है कि माता के प्रसाद में ऐसी चमत्कारी शक्तियां होती हैं जिसको खाने से इंसान को गुप्त रोग से छुटकारा मिल जाता है। बहुत से व्यक्ति ऐसे हैं जो शर्म के मारे गुप्त रोग के बारे में बताते नहीं है। लेकिन आसपास के लोगों ने बताया कि इस मंदिर में जाने के बाद गुप्त रोग से छुटकारा मिल जाता है।