क्यों किया जाता है पिशाच मोचन श्राद्ध?, कैसे मिलती है मरे हुए इंसान की आत्मा को मुक्ति

पिशाच मोचन श्राद्ध कर्म द्वारा व्यक्ति अपने पितरों को शांति प्रदान करने का प्रयास करता है तथा उनकी प्रेत यानी की आत्मा को मुक्ति दिलाता है।

 
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इस दिन पितरों को भोजन एवं वस्त्र आदि देना उत्तम रहता है।


Digital Desk: जिन लोगों के पूर्वज की मौत अकस्मात दुर्घटना या फिर किसी गैर प्राकृतिक तरीके से हो जाती है, उनकी आत्मा को शांति दिलाने के लिए पिशाच मोचन श्राद्ध कराने का प्रयास करना चाहिए। हिंदू धर्म के अनुसार व्यक्ति के जन्म के बाद उसकी मृत्यु को जीवन का एक अलग चरण बताया जाता है। वहीं हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद यह संस्कार एवं श्राद्ध को एक महत्वपूर्ण कार्य बताया जाता है। इसीलिए मृत्यु के बाद लोगों का श्राद्ध करना जरूरी होता है।

पिशाच मोचन श्राद्ध:

मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाले पिशाच मोचन श्राद्ध में भी लोग अपने पितरों का पिंडदान करते हैं। कहते हैं कि जिन लोगों की मृत्यु अकाल होती है, उनका श्राद्ध पिशाच मोचन श्राद्ध वाले दिन करना चाहिए। इससे उनकी आत्मा को मुक्ति मिलती है, इसीलिए इस साल पिशाच मोचन श्राद्ध शुक्रवार 17 दिसंबर को पड़ रहा है।

कहते हैं कि, अगर आत्मा को शांति नहीं मिलती तो वह भूत प्रेत के रूप में इधर-उधर भटकते रहते हैं। ऐसे में इस पूजा को करने से पित्र दोष से मुक्ति मिलती है। श्रद्धा के अनुसार विधि विधान द्वारा बताई गई पूजा के दौरान इन्हें शांति और मुक्ति मिलती है।

विधान:

इस दिन व्रत, स्नान, दान, जप, होम और पितरों के लिए भोजन वस्त्र आदि दान देना उत्तम रहता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन प्रातः काल स्नान करके संकल्प और उपवास करना चाहिए। अमावस्या के दिन किसी पात्र में जल भरकर कुशा के पास दक्षिण दिशा की ओर अपने मुख करके बैठ जाएं और सभी पितरों को जल दें। अपने घर परिवार स्वास्थ्य आदि की सुविधा की प्रार्थना करनी चाहिए। तिलक आचमन के उपरांत पीतल या तांबे के बर्तन में पानी लेकर उसमें दूध, दही, घी, शहद, कुमकुम, अक्षत और तिल रखना चाहिए।

हाथ में शुद्ध जल लेकर संकल्प करिए और उस व्यक्ति का नाम लीजिए। जिसके लिए आप पिशाच मोचन का श्राद्ध कर रहे हैं। नाम लेते हुए जल भूमि पर छोड़ दीजिए। इसी प्रकार आगे की विधि संपूर्ण की जाती है। पीपल के वृक्ष पर भी जल अर्पण किया जाता है, तथा भगवत कथा का श्रवण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।