मिर्ज़ापुर और भदोही के कालीन व्यापार ने भरी अंतराष्ट्रीय उड़ान, विदेशी उद्योगों को दे रहा है टक्कर

यहां के कालीन की डिमांड अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी है, ऐसे में अब मिर्ज़ापुर और भदोही के कालीन विदेशों में भी एक्सपोर्ट इंपोर्ट किए जा रहे हैं।

 
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मिर्ज़ापुर के आर्थिक विकास में योगदान देता है कालीन का व्यापार।

मिर्ज़ापुर, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में वाराणसी, भदोही और मिर्ज़ापुर जिले की अर्थव्यवस्था में कालीन का उद्योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां से करीब डेढ़ हजार से भी ज्यादा रजिस्टर्ड कंपनी इन जिलों में कालीन बनाने और एक्सपोर्ट करने के काम में लगी हुई है। ऐसे अकेले लगभग भदोही और बनारस के 2 लाख़ से भी ज्यादा कारीगरों ने 10 लाख़ परिवारों को जोड़ा है। इसका मतलब यह है कि 10 लाख परिवारों की जिंदगी इस कालीन व्यापार से जुड़ी हुई है। इन सभी के लिए भदोही में खुला कारपेट-एक्सपोर्ट-मार्ट के कारोबार इजाफा साबित कर रहा है। इस मार्ट के खुलने के बाद भदोही, मिर्ज़ापुर और वाराणसी के कालीन कारोबारियों में के कारोबार में इजाफा हुआ है। जिसके चलते अब भदोही मिर्ज़ापुर और बनारस में बने हुए कालीन की डिमांड विदेशों तक में है, केवल इतना ही नहीं यहां के बने हुए कालीन उद्योग विदेशी कालीन कारोबार को टक्कर देते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहां पर अच्छी क्वालिटी का कालीन बनाया जाता है, जो उनके मुकाबले काफी मजबूत एवं टिकाऊ होता है।

मिर्ज़ापुर और भदोही है कालीन शहर:

मिर्ज़ापुर और भदोही को कालीन व्यापार की वजह से कालीन नगरी के रूप में मानते हैं, क्योंकि यहां से बनी हुई कारपेट दुनिया भर में पसंद की जाती हैं। बड़े-बड़े व्यापारी एवं कारोबारी भदोही एवं मिर्ज़ापुर में बनी हुई कारपेट उनके घर तथा दफ्तर में रखते हैं। भदोही और मिर्ज़ापुर कारपेट पाकिस्तान, ईरान और तुर्की में बनी कारपेट से अधिक पसंद की जाती है। यही वजह है कि कोरोनावायरस काल भी कालीन कारोबार मंदी का शिकार नहीं हुआ था। ऐसा माना जाता है कि अब कालीन की मांग लगातार बढ़ती हुई नजर आ रही है। ऐसे में विदेशों से भदोही और मिर्ज़ापुर के कालीन की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2020-21 में राज्य से लगभग 4108 करोड़ों रुपए का निर्यात कालीन उद्योग द्वारा किया जा सका था, कालीन निर्यात में इजाफा होने की वजह से योगी आदित्यनाथ भी अब इसमें अपना इंटरेस्ट ले रहे हैं। जिसके चलते अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कारपेट मेला यानी कि कालीन मेला लगाया जाएगा, जिसमें विदेशों से लोग आएंगे और फिर से मिर्ज़ापुर और भदोही के कालीन व्यापार को एक नई गति मिल जाएगी।

लोग बताते हैं कि यहां के बने कालीन मुंबई,दिल्ली, गुजरात, गोवा, तमिलनाडु, राजस्थान, समेत देश के अन्य कई शहरों में तो जाते ही हैं, साथ ही साथ विदेश में जैसे अमेरिका, यूरोप, जर्मनी, जापान, सहित अन्य कई देशों में भी जाते हैं। सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका में किया जाता है।

बताया जाता है कि यहां से बनाए हुए कारपेट बहुत महंगे दिखते हैं। ऐसे में विदेशों में इनकी कीमत $50 से शुरू होती है और $500 तक होती है। विदेशों में बिकने वाली कुल कारपेट में यह सबसे महंगी मानी जाती है, इनकी गांठ काफी बारीक होती है। जितनी ज्यादा गांठ होती है, इनकी कीमत उतनी ज्यादा होती है। इस कालीन में प्रत्येक रंग का इस्तेमाल किया जाता है। यह रंग पेड़ पौधों के हो सकते हैं, उनके छाले चाय पत्ती, इस तरह से बनाए जाते हैं। इस कॉर्पोरेट का अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में खूब निर्यात हो रहा है, जो एक पॉजिटिव बात है।

मिर्ज़ापुर के अन्य प्रोडक्ट्स:

मिर्ज़ापुर के व्यापारियों ने अब अंतरराष्ट्रीय उड़ान भर दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि, वह खुद विदेशों में जाकर अपने सामान बेच रहे हैं, बल्कि वह अपने सामान को विदेश में भेज रहे हैं और अच्छा खासा प्रॉफिट कमा रहे हैं। बताया जाता है कि मिर्ज़ापुर के बनाए हुए लकड़ी के शतरंज की गोटियां जर्मनी तक में बिकती हैं। ऐसे ही मिर्ज़ापुर के दुर्ग टमाटर, लाल मिर्च इन सब का व्यापार भी अब विदेशी मार्केट में तेज होता हुआ नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि बड़े स्तर आयात निर्यात किया जाता है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मार्केट में अब मिर्ज़ापुर अपनी एक अहम भूमिका एवं धाक जमा चुका है।